राकेश, ऊना: हिमाचली कृषि प्रधान है राज्य हैं। यहां के अधिकतर लोगों का व्यवसाय कृषि और बागवानी ही हैं जिससे लोगों की आमदनी होती है। ऐसे में अब यहां के युवा भी खेती की नई-नई तकनीक को अपनाकर अच्छा मुनाफ़ा कमा रहे हैं। जैविक खेती को अपना कर कुछ ऐसा ही कारनामा ऊना के बनगड गांव में एक प्रगतिशील युवा किसान सुरेश कुमार ने कृषि के क्षेत्र में कर दिखाया है। युवा किसान ने जैविक खेती को अपनाया है और बकायदा उन्होंने अपने खेत में कई प्रकार की सब्जियां भी उगाई है। सुरेश कुमार पहले कीटनाशक का इस्तेमाल कर सब्जियों को उगाता था। इससे सब्जियों की पैदावार तो बेहतर होती थी लेकिन मिट्टी खराब होने के ज्यादा चांस रहते थे। सुरेश ने 1 साल पहले जैविक खेती को शुरू किया था और अब उसे जैविक खेती में बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।
सुरेश ने अपने खेतों में फूल गोभी ,टमाटर ,शलगम,चुकंदर की फसल उगाई हुई है। जैविक खेती के इस्तेमाल से फसलों का परिणाम अच्छा आ रहा है और उन्हें अपनी फसल के मार्केट में उचित दाम भी मिल रहे हैं। जैविक खेती के इस्तेमाल करने से एक तो उनके खेतों में सब्जियां स्वादिष्ट पैदा हो रही है। वहीं हाथों-हाथ सब्जियां भी मार्केट में बिक रही है। सुरेश की ओर से जैविक खेती को इस्तेमाल में लाया गया हैं तब से वह सब्जियों की पनीरी भी पैदा कर रहा है और उसी पनीरी से फसलें तैयार कर मार्केट में बेच रहा है,जिससे उसकी आर्थिकी भी काफी मजबूत हुई है। सुरेश कुमार और किसानों को भी जैविक खेती अपनाने के लिए संदेश दे रहा है।

जैविक खेती एक्सपर्ट की माने तो वह किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। वह पहले किसानों को सैंपल के तौर पर एक कनाल भूमि पर जैविक खेती की फसल उगाने की शुरुआत करते हैं और जिसका बेहतर परिणाम आने के बाद फिर उसको बड़ी मात्रा में पैदा करने के लिए प्रेरित करते हैं। जैविक खेती एक्सपर्ट की माने तो जैविक खेती करने के लिए जैविक खाद का ही इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है और इसमें सबसे ज्यादा गोबर की खाद अहम भूमिका निभाती है हिमाचल प्रदेश में किसान लगातार जैविक खेती को अपना रहे हैं इसमें काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
