शिमला : चंद्रिका – महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के स्थापना दिवस पर आज राजभवन में ‘मिलन कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। राज्यपाल ने हिमाचल में रह रहे इन राज्योें के नागरिकों को राजभवन में आमंत्रित किया और इस दिवस को कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया। इस अवसर पर, दोनों राज्यों से संबंधित हिमाचल में रह रहे प्रबुद्ध नागरिकों ने राज्यपाल के साथ सांस्कृतिक विरासत और उच्च परम्पराओं पर चर्चा की।
राज्यपाल ने मेहमानों को हिमाचल टोपी व पौधा भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत की संकल्पना सबको जोड़कर होती है। हम सबके सामूहिक प्रयासों से ही ‘एक भारत-श्रेष्ठ’ के संकल्प की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं। उन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद गठित राज्यों की विरासत पर भी चर्चा की। हिमाचल के गठन और पहले मुख्यमंत्री यशवंत सिंह परमार के योगदान का भी किया। उन्होंने कहा कि लम्बे राजनीतिक संघर्ष के बाद संयुक्त महाराष्ट्र समिति ने अपना लक्ष्य तब प्राप्त किया, जब मुंबई को अपनी राजधानी के रूप में 1 मई, 1960 को बॉम्बे पुनः संगठन अधिनियम के तहत निर्माण किया। इस प्रकार, 1960 में महराष्ट्र राज्य का गठन किया गया था। कहा जाता है कि पहले महाराष्ट्र और गुजरात राज्य, बॉम्बे नामक राज्य का अंग हुआ करते थे। राजयपाल ने कहा कि इसी तरह प्राचीनता एवं ऐतिहासिकता की दृष्टि से गुजरात, भारत का अत्यंत महत्त्वपूर्ण राज्य है। गुजरात को “महापुरुषों की धरती” कहा जाता है। उन्होंने कहा कि देश के विकास में इन राज्यों के नागरिकों की अहम भूमिका रही है। आज गुजरात और महाराष्ट्र के नागरिक दुनिया के कोने-कोने में फैले हैं और भारत की समृद्ध संस्कृति, परम्पराओं व मान्यताओं का प्रचार-प्रसार भी कर रहे हैं।
शुक्ल ने कहा कि प्रत्येक वर्ष, समग्र राज्य अपने राज्य के स्थापना दिवस को गर्व के साथ मनाते है। उन्होंने कहा कि देश के हर राज्य की अपनी अलग भाषा और विविध संस्कृति है। इतनी विविधता के बावजूद भी देश एक सूत्र में बंधा हुआ है। उन्होंने भारत सरकार के गृह मंत्रालय के इस तरह के स्थापना दिवस मनाने के नये प्रयास की सराहना की।
