संजू, शिमला। ऐतिहासिक कमला नेहरू महिला एवं शिशु अस्पताल (KNH) को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में शिफ्ट किए जाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (AIDWA) ने सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की मांग करते हुए 15 सितंबर को टालेण्ड से सचिवालय तक विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। समिति ने चेतावनी दी है कि मांग नहीं मानी गई तो सरकार के खिलाफ आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
AIDWA की राज्य अध्यक्ष रंजना जरेट, सचिव फालमा चौहान और सचिवालय सदस्य सुनिधि चौहान ने पत्रकारवार्ता में आरोप लगाया कि एक रोबोटिक सर्जरी की सुविधा के नाम पर ऐतिहासिक KNH अस्पताल की व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। उनका कहना है कि KNH महिलाओं और बच्चों के उपचार के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान रहा है और इसे खत्म करने या बांटने का प्रयास जनहित में नहीं है।
समिति पदाधिकारियों के मुताबिक IGMC पहले ही मरीजों की भारी भीड़ के दबाव में है। ऐसे में KNH के विभागों को वहां स्थानांतरित करने से गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और अन्य मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि KNH में पहले उपलब्ध कई उपचार और दवाएं निशुल्क मिलती थीं, जबकि शिफ्टिंग के बाद मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि विभागों के स्थानांतरण से प्रशिक्षु डॉक्टरों की पढ़ाई और प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा है।
महिला समिति ने शिफ्टिंग को लेकर गठित कमेटी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कमेटी के कुछ सदस्य एक्सटेंशन पर कार्यरत हैं और जनहित के बजाय निजी हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि ये आरोप समिति की ओर से लगाए गए हैं।
फालमा चौहान ने बताया कि KNH को बचाने के लिए चलाए गए हस्ताक्षर अभियान को व्यापक समर्थन मिला है। उनके अनुसार अभियान में एक लाख से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर कर अस्पताल को शिफ्ट करने के फैसले का विरोध दर्ज कराया है। इन हस्ताक्षरों को ज्ञापन के साथ जल्द सरकार को सौंपा जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना चाहती है तो रोबोटिक सर्जरी समेत सभी आवश्यक सुविधाएं KNH परिसर में ही विकसित की जाएं। समिति ने लोगों से 15 सितंबर के सचिवालय मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।
सुनिधि चौहान ने 16 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक का हवाला देते हुए कहा कि उस समय IGMC में गायनी विभाग के लिए रोबोटिक सर्जरी की सुविधा को लेकर 50 बिस्तर आवंटित करने पर सहमति बनी थी। उनका आरोप है कि इसके बाद पूरे गायनी वार्ड को ही IGMC में स्थानांतरित कर दिया गया। उन्होंने इसे महिलाओं के स्वास्थ्य अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
KNH को IGMC में शिफ्ट करने का मामला फिलहाल न्यायालय में भी विचाराधीन है। AIDWA का कहना है कि वह इस मुद्दे पर सड़क से लेकर न्यायालय तक अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
