कांगड़ा: पितृपक्ष यानी श्राद्ध में पितरों को विशेष तौर पर याद किया जाता है। तर्पण में कौवे को खाना खिलाना अति महत्वपूर्ण माना गया है। इसके पीछे रोचक कहानी है। कौए को यम का प्रतीक माना जाता है। अगर कौआ श्राद्ध को भोजन ग्रहण कर लें तो पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। साथ ही ऐसा होने से यम भी खुश होते हैं और उनकी खबर उनके पितरों तक पहुंचती है। गरुण पुराण के अनुसार कौवे को यम का वरदान है। उन्होंने कौवे को कहा था कि तुमको दिया गया भोजन पूर्वजों की आत्मा को शांति देगा।

25 सितम्बर तक चलेगी अश्विन माह की अमावस्या
आश्विन माह की अमावस्या पितृपक्ष भाद्रपद की पूर्णिमा से शुरू हुआ और अश्विन माह की अमावस्या 25 सितंबर तक चलेगा। हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष का काफी महत्त्व है। इस दिन लोग पूर्वजों और अतृप्त आत्माओं की सद्गति के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं। वह पितरों के नाम से जल और अन्न का दान करते हैं।

