मंडी, धर्मवीर-:हिमाचल प्रदेश के मंडी में हिमाचल मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव संगठन (एमआर एसोसिएशन) की एनुअल जनरल बॉडी (एजीबी) मीटिंग का आयोजन किया गया। बैठक में पिछले वर्ष के कार्यों और गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई, साथ ही वर्ष 2025 के लिए नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। यह बैठक संगठन के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर की अध्यक्षता में संपन्न हुई।बैठक के दौरान मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। मीडिया से बातचीत करते हुए अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने एम्स चमियाना में लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि इन प्रतिबंधों को जल्द से जल्द हटाया जाए, ताकि मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स अपना कार्य सुचारू रूप से कर सकें।उन्होंने बताया कि मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1954 के तहत कार्य करते हैं और उन्हें दवाइयों के प्रचार-प्रसार का पूरा अधिकार है। ऐसे में उनके कार्य पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा सदन में इन प्रतिबंधों को हटाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रकाश ठाकुर ने कहा कि मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं और डॉक्टरों को नई दवाइयों की जानकारी उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में सरकार को उनके कार्य में सहयोग करना चाहिए, न कि बाधाएं उत्पन्न करनी चाहिए।
वहीं, एजीबी मीटिंग के दौरान संगठन ने केंद्र सरकार से चारों लेबर कोड्स को वापस लेने की भी मांग उठाई। एसोसिएशन का मानना है कि इन कोड्स के लागू होने से मजदूर वर्ग के हित प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा, आम जनता को राहत देने के लिए दवाइयों पर शून्य प्रतिशत जीएसटी लागू करने की मांग भी रखी गई।संगठन ने कहा कि सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है, और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
