शिमला : कमल भारद्वाज – हिमाचल प्रदेश 108, 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधि राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मिले। एंबुलेंस कर्मचारी लंबे समय से एक नीति बनाने और वेतन बढ़ाने को लेकर मांग कर रहे हैं। इसी मसले पर प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात की और अपनी मांगे सामने रखी यूनियन के लोगों का कहना है कि उच्च न्यायालय के फैसले के बाद भी उन्हें न्यूनतम वेतन नहीं दिया गया । इसके अलावा पिछली कंपनी ने भी एंबुलेंस कर्मियों का पूरा भुगतान नहीं किया और लाखों का एरियर भी नहीं मिला है।
एंबुलेंस यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष और ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी पूरन चंद ने बताया कि पिछली सरकार के दौरान उनकी मांगों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। कोविड काल के दौरान एंबुलेंस चालकों ने पूरी लगन से काम किया और लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान तक जोखिम में डाली, लेकिन इसके बावजूद एंबुलेंस कर्मियों को उचित वेतन नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके मामले में उच्च न्यायालय ने भी कर्मियों की मांग को माना है और न्यूनतम वेतन के दायरे में लाकर न्यूनतम 21 हज़ार रुपए वेतन उन्हें दिए जाने की बात कही, लेकिन इस पर भी पूर्व सरकार ने अमल नहीं किया।
यूनियन के अध्यक्ष पूरन चंद ने कहा कि वह नेशनल हेल्थ मिशन जो केंद्र योजना है के अंदर काम करते हैं। ऐसे में उन्होंने मांग की कि इसके लिए जो सोसाइटी बनाई गई है उसी के अधीन 102 और 108 एंबुलेंस कर्मियों को भी लाया जाए। इसके अलावा पूरन चंद ने नई आउट कंपनी पर भी आरोप लगाया कि नई अपनी पिछले 1 साल कुछ महीने से काम कर रही है लेकिन स्थिति ठीक नहीं है । उन्होंने कहा कि इससे पहले एक कंपनी को खराब प्रक्रिया के चलते हटाया भी गया था लेकिन उस कंपनी ने अभी तक एंबुलेंस कर्मियों का 1 महीने का वेतन और फुल एंड फाइनल भुगतान नहीं किया है। पूरन चंद ने कहा कि वर्तमान सरकार ने जैसे निराश्रित बच्चों के लिए अहम फैसला लिया हम उसका स्वागत करते हैं। उन्होंने नई सरकार से उम्मीद जताई है और मुख्यमंत्री को आज अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपा है।
