संजु चौधरी, शिमला: 8 मार्च को विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने से पहले ही वामपंथी संगठन ने शिमला में डीसी कार्यालय के बाहर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इन संगठनों का कहना है कि केंद्रीय बजट में सरकार ने मजदूरों और महिलाओं के बजट में कटौती कर इनके हितों को नुकसान पहुंचाया हैं। वामपंथ ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार ने मनरेगा जैसी जरूरी योजनाओं के बजट में कटौती कर दी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों और महिलाओं का रोजगार छिन गया हैं।
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की प्रदेश सचिव फालमा चौहान ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान सभी संगठनों ने मांग की है कि सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए 200 दिनों का निश्चित रोजगार उपलब्ध करवाना होगा। इसके अलावा महिलाओं के लिए पुरुषों के बराबर रोजगार व 600 दिहाड़ी तय की जाए। मजदूरों के लिए बनाए गए 44 श्रम कानून, नई शिक्षा नीति को निरस्त किया जाना चाहिए। महिलाओं के साथ पूरे देश भर में अत्याचार हो रहे हैं जिस पर रोक लगाई जानी चाहिए।
