कुल्लू : मनमिंद्र अरोड़ा- कुल्लू के ढालपुर मैदान में इन दिनों गांधी शिल्प बाजार सजा हुआ है। शिल्प बाजार में भारत के 14 राज्यों से आए शिल्पकारों की प्रतिभा को भी सम्मान मिल रहा है। यहां पर विभिन्न उत्पादों के स्टॉल सजाए गए हैं। जहां पर हस्तशिल्प, हथकरघा से बनी हुई वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई गई है और जनता भी इन्हें खरीदने में अपनी दिलचस्पी दिखा रही है। यह शिल्प बाजार केंद्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय ब हिल क्वीन हस्तशिल्प हथकरघा बुनकर कल्याण समिति के संयुक्त तत्वाधान में लगाया गया है। इस प्रदर्शनी में विभिन्न उत्पाद सजाए गए हैं जिसमें मधुबनी पेंटिंग, चंबा रुमाल, चंबा चप्पल और बांस से बने हुए उत्पादों के अलावा कॉटन, सिल्क के सूट भी लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं।
जिला कुल्लू के विभिन्न इलाकों से रोजाना लोग इस मेले में पहुंच रहे हैं और कलाकारों की प्रतिभा का भी सम्मान कर रहे हैं। शिल्प बाजार मेले में राजस्थान से आई सहायता समूह की पदाधिकारी निवेदिता का कहना है कि शिल्प बाजार में कई तरह के उत्पाद लेकर आई है जो हाथ से तैयार किए गए हैं। वही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दृष्टि से राजस्थान में भी इन उत्पादों को बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब आज के समय में लोग भी हाथ से बनी चीजों को काफी पसंद कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ से आए शिराज का कहना है कि गांधी बाजार मेले में उन्होंने प्लास्टिक के कचरे से तैयार हैंड बैग का स्टॉल लगाया है और इससे पर्यावरण संरक्षण को भी काफी मदद मिल रही है। आम जनता भी अब पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक हो रही और कचरे से बनाए गए हैंड बैग भी जनता पसंद कर रही है।
पश्चिम बंगाल से स्टॉल लगाने आए एसके कुतुबुद्दीन ने बताया कि चमड़े से भी आज के समय में कई तरह की कारीगरी तैयार की जा रही है। वही इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। शिल्प बाजार में चमड़े की कला को भी लोगों के द्वारा पसंद किया जा रहा है।
दिल्ली से आए मोहम्मद शकील ने बताया कि इससे पहले भी वे अपने उत्पादों को कई राज्यों में अपना स्टाल लगा चुके हैं। हालांकि जमाना मशीनी युग की और भी बढ़ा हुआ है लेकिन उसके बाद भी हाथ की कला को आज भी सम्मान मिल रहा है।
