अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा को वर्ष में लगभग 35 बैठकें आयोजित करनी चाहिए। कई सालों बाद इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज हुई है। इस बार के सत्र में कुल 34 घंटे का कार्य हुआ और 85 प्रतिशत उत्पादकता हासिल की गई, जो देश की तमाम विधानसभाओं में उच्चतम श्रेणी की उत्पादकता में शामिल होती है।उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा देश की सबसे अधिक उत्पादक विधानसभाओं में गिनी जाती है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में सदन की उत्पादकता 98 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष यह 132 प्रतिशत तक पहुँची थी, जो यह दर्शाता है कि विधानसभा ने निर्धारित समय से कहीं अधिक कार्य किया।
सवाल-जवाब के दौरान सदस्यों द्वारा पूछे गए लगभग सभी तारांकित और अतारांकित प्रश्नों के उत्तर सदन की ओर से प्रदान किए गए। जिन प्रश्नों के उत्तर समयाभाव में उपलब्ध नहीं कराए जा सके, उनके लिए अध्यक्ष ने सरकार को निर्देश दिया है कि आगामी सत्र की शुरुआत में संबंधित विधायकों को सभी आवश्यक सूचनाए उपलब्ध कराई जाएँ।विधानसभा अध्यक्ष ने सत्र की विधायी उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अब तक सदन में 90 से अधिक विधेयक पास किए जा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश को राज्यपाल और राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है। केवल 5–6 विधेयक ही प्रक्रिया में लंबित हैं।नियम 75 के तहत मिले विशेषाधिकार प्रस्तावों पर अध्यक्ष पठानिया ने कहा कि राजस्व मंत्री जगत नेगी और भाजपा विधायक विपिन परमार द्वारा भेजे गए प्रस्तावों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। नियमों की परिधि में आने वाले बिंदुओं की पूर्ण जांच के बाद ही सदन के पटल पर विस्तृत तथ्य प्रस्तुत किए जाएंगे।
धारा 118 से जुड़े महत्वपूर्ण बिल के संबंध में भी उन्होंने बताया कि आज सदन में व्यापक चर्चा हुई। सत्ता और विपक्ष—दोनों की भागीदारी के बाद यह निर्णय लिया गया कि इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। कमेटी गठित होने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार कर सदन के सामने रखेगी।अध्यक्ष पठानिया ने कहा कि तपोवन में संपन्न शीतकालीन सत्र कई दृष्टियों से रिकॉर्ड और उपलब्धियों वाला रहा तथा इसे वह “सफल और ऐतिहासिक” करार देते हैं।
