धर्मशाला (राहुल चावला): टैक्सियों में लगाए जा रहे नए जीपीएस का विरोध देवभूमि टैक्सी-मैक्सी एसोसिएशन कांगड़ा की ओर से जताया जा रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि टैक्सियों में पहले से ही जीपीएस लगे है तो नए जीपीएस लगाने का कोई औचित्य नहीं है। जो जीपीएस पहले लगाए गए है उन्हें ही रिचार्ज किया जाना चाहिए। आज अपनी इसी मांग को लेकर एसोसिएशन ने आरटीओ कांगड़ा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौंपने के साथ ही एसोसिएशन ने चेताया है कि 8 सितंबर को होने वाली बैठक में उनकी समस्या का हल न किया गया तो एसोसिएशन सरकार को 1 माह का समय देगी, उसके बाद प्रदेश स्तरीय बैठक में आगामी रणनीति बनाई जाएगी।
एसोसिएशन के जिला कांगड़ा अध्यक्ष बिंद्र कुमार और सचिव दीप कुमार ने बताया कि वर्ष 2019 में टैक्सियों में परिवहन विभाग ने जीपीएस ट्रैकर अनिवार्य किया था। जिसके लिए विभाग ने कुछ कंपनियों को अधिकृत किया था ओर कंपनियों ने प्रति गाड़ी 18 हजार रुपए चार्ज किया था, जो कि अन्य राज्यों के मुकाबले चौगुनी कीमत थी। अब इनमें से कई कंपिनयां काम छोड़ चुकी है, जबकि टैक्सी ऑपरेटर को परिवहन विभाग शिमला से कॉल आ रही है कि आपका जीपीएस नहीं चल रहा, उसे रिचार्ज करवाएं, विभाग को अब 3 साल बाद रिचार्ज की याद आई है।
उन्होंने बताया कि हिमाचल में जीपीएस रिचार्ज भी अन्य राज्यों के मुकाबले महंगा है। गाड़ियों के दस्तावेज रिन्यू करवाने के लिए विभाग जीपीएस लगवाने की बात कह रहा है, वहीं पुलिस व परिवहन विभाग की ओर से टैक्सियों के चालान काटे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब विभाग ने 13 और कंपनियों को जीपीएस ट्रैकर के लिए अधिकृत किया है, ऐसे में क्या गारंटी है कि यह कंपनियां काम छोड़कर नहीं जाएंगी।
एसोसिएशन की मांग है कि जो जीपीएस गाड़ियों में पहले से लगे हैं, वहीं रिचार्ज किए जाएं और रिचार्ज की कीमत कम से कम रखी जाए। टैक्सी चालक बार-बार जीपीएस का खर्च नहीं उठा सकते, जब तक सरकार इस मसले को नहीं सुलझाती, तब तक व्यवसायिक वाहनों के दस्तावेज पहले की तरह ही बनाए जाते रहें और गाडिय़ों के चालान न काटे जाएं। एसोसिएशन ने परिवहन विभाग व सरकार से टैक्सी ऑपरेटर्स को राहत देने की मांग की है।
