अनिल कुमार, किन्नौर: किन्नौर में इन दिनों ‘काले सोने’ के नाम से प्रसिद्ध चिलगोजे का व्यापार जोरो से चल रहा है। इस व्यापार को करने वालों को इन दिनों 1500 रुपए प्रति किलो के हिसाब से मिल रहे हैं। अक्तूबर के महीने में इसकी फसल बाजार में आ जाती है जिससे भारी भरकम मुनाफा इसे बेचने वाले व्यापारियों को हो रहा है। यही वजह है कि ठंडे, सूखे व पर्वर्तीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला दुनिया का दुर्लभ प्रजाति में से एक चिलगोजा नामक पेड़ जो कि हिमायल की गोद में बसे जनजातीय क्षेत्र किन्नौर जिले में पाया जाता है जिसे किन्नौर में ‘काला सोना’ भी कहा जाता है। अक्टूबर माह तक यह फसल रिकांग पिओ बाजार में आ जाती है। इन दिनों यह व्यापरियों की ओर से अलग-अलग भाव पर खरीदा व बेचा जा रहा है।

इन दिनों चिलगोजे एक हजार रुपए से 12 सौ रुपए तक बिक रहा है जबकि पिछले वर्ष 15 सौ रुपए तक चिलगोजे के दाम स्थानीय ग्रोवर को मिले रहे थे, लेकिन जहां तक बात करें हम किन्नौर में चिलगोजे की तो इस बार बहुत अधिक मात्रा में उत्पादन होने के कारण चिलगोजे के उचित दाम स्थानीय लोगों को नहीं मिल पा रहे हैं। इस वर्ष पिछले वर्ष की अपेक्षा चिलगोजा का उत्पादन अधिक है जिस वजह से चिलगोजा के दाम कम मिल रहे हैं। इसी तरह 2015 में भी बंपर पैदावार होने से न्योजे का भाव गिर कर मात्र 250 रुपए तक आ गया था।

जिले के स्थानीय व्यापारयों का कहना है कि चिलगोजे का दाम वैसे ही कम मिल रहा है। चिलगोजा को भी सेब की भांति विभिन्न मंडियों में ले जाने के लिए किसी भी तरह की परमिट की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए, ताकि जिले के क्षेत्रों में जहां चिलगोजे का उत्पादन होता है। उन लोगों को किसी भी तरह की परेशानियों का सामना ना करना पड़े। चिलगोजे का व्यापार करने के लिए जिले के अलावा दूसरे जिले व प्रदेशों से व्यापारी रिकोंग पिओ पहुंच जाते है व यहां से चिलगोजा खरीदने के बाद दिल्ली आदि मंडियों में भेजते हैं।
बता दें कि चिलगोजे का पेड़ हिमाचल प्रदेश के किन्नौर व चंबा, पांगी, भरमौर में ही पाया जाता है, जबकि इसके अलावा यह अफगानिस्तान, बलूचिस्तान व दक्षिण पश्चिम अमेरिका में भी पाया जाता है। खास बात यह है कि एशियन चिलगोजे स्वाद में बेहतर और आकार में अन्य देशों के मुकाबले बड़े होते है। कई वर्षों से न्योजे यानि चिलगोजे का व्यापार करते आ रहे पंगी निवासी किशोर माजू नेगी ने कहा कि इस वर्ष जिले में न्योजे की पैदावार ज्यादा है। गुलाब चंद नेगी ने कहा कि न्योजे के व्यापार में व्यापारी को 5 से 10 पर्सेंट का ही मुनाफा होता है। उन्होंने कहा कि पहले न कोई टैक्स लगता था और न ही रॉयल्टी, एक्सपोर्ट परमिट आदि लगते है परंतु अब 10% टैक्स के अलावा परमिट का होना अनिवार्य किया गया है।
