अरविंदर सिंह, हमीरपुर: राज्य स्तरीय बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर जयंती के 132वें समारोह को गुरुवार को बाइक रैली के साथ बड़े धूमधाम से हमीरपुर में आयोजित किया गया। इस आयोजन की शुरुआत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाल स्कूल के ग्राउंड से शुरू हुई। सैकड़ों युवाओं ने बाइक रैली में हाउसिंग बोर्ड कालोनी से बाईपास चौकओर वहां से हीरा नगर,अणु डिग्री कॉलेज के चौक से होती हुई एनआईटी के गेट से होती हुई टेलीफोन एक्सचेंज चौक से डीसी ऑफिस चौक से होती हुई जब गांधी चौक पहुंची तो भारी संख्या में लोगों ने बाबासाहेब के रथ पर पुष्प वृष्टि की।
वहां जय भीम के नारों से पूरा गांधी चौक गुंजायमान हुआ। गांधी चौक पर राष्ट्रीय दलित नेता ओंकार सिंह भाटिया ने बाबासाहेब को नमन करते हुए कहा कि महिलाओं के लिए जितना कार्य बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने किया है उतना कार्य आज तक किसी नेता ने नहीं किया और ना ही उस तरह की सोच पैदा की क्योंकि आजादी के साथ ही वोट देने का अधिकार तो महिलाओं को डॉक्टर अंबेडकर साहिब ने दे दिया था। उसके बाद संपत्ति का अधिकार पुरुषों के बराबर मिलना बाकी था । इसके अलावा विवाह संबंधी सुधार होने बाकी थे यहां तक की सामाजिक स्वतंत्रता से जुड़े सैकड़ों मुद्दे जो महिलाओं को गुलामी की जंजीरों में स्वतंत्रता के बाद भी जकड़े हुए थे। उन सभी समस्याओं पर अगर किसी राष्ट्रीय नेता का विचार था तो वह थे बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर। महिलाओं को जहां बराबरी के अधिकार देने की पैरवी की वही संपत्ति रखने की एवं विवाह ओर सामाजिक स्वतंत्रता से जुड़े हुए सभी अधिकारों के लिए बाबासाहेब ने जोरदार वकालत की। यह वह समय था जहां महिलाओं को संपत्ति का कोई अधिकार नहीं था। तलाक का कोई अधिकार नहीं था ओर शादी के ऊपर भी आपत्ति जताने का कोई अधिकार नहीं था। यहां तक की उसे अपना जीवन अपने ढंग से जीने का अधिकार नहीं था। इन सभी अधिकारों के लिए बाबासाहेब लड़े और ना केवल भारतवर्ष को अपितु पूरे विश्व को बाबासाहेब ने सामाजिक न्याय का मार्ग बताया जो दुनिया भर में आज भी प्रसांगिक हैं।
उन्होंने कहा कि आज भी बाबासाहेब को जहां विधि पिता के नाम से जाना जाता हैं वहीं संविधान विशेषज्ञ वह कानून विशेषज्ञ ओर वित्त विशेषज्ञ एवं महान पत्रकार ओर भारत के नवनिर्माण के रूप में भी जाना जाता हैं। जो लोग केवल यही जानते हैं कि बाबा साहिब ने अनुसूचित जातियों ओर जनजातियों एवं अन्य पिछड़ा वर्ग, श्रमिकों, मजदूरों ओर खेती करने वालों के लिए काम किया। उन्हें बाबासाहेब के बारे में अपनी सोच बदलनी होगी और सोच तभी बदल सकती है जब हम बाबासाहेब को पढेंगे। अगर कोई दुष्ट व्यक्ति अपनी दुष्ट विचारों का आलेप लगाकर बाबासाहेब को परिभाषित करना चाहेगा तो वह कभी कामयाब नहीं होगा क्योंकि बाबासाहेब अपने आप में एक वृहद पुस्तकालय हैं। उसे समझना सामान्य बुद्धि वाले व्यक्तियों के लिए कठिन हैं।
बाबा साहेब के जन्मदिवस पर केक काटकर एवं लड्डू बांटकर नाच गाकर जयंती समारोह को मनाया गया। उसके बाद बाबा साहेब का समानता रथ गांधी चौक से सब्जी मंडी होता हुआ अस्पताल चौक से भोटा चौक ओर वहां से बस स्टैंड और बस स्टैंड से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक बाल स्कूल के ग्राउंड में पहुंचा और वहां दलित समाज सेवी संगठनों ने 14 अप्रैल के विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा की जिसमें बाबा साहेब की जयंती की समीक्षा भी की।
