राहुल चावला, धर्मशाला: प्रदेश में इन दिनों साइबर क्राइम के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। शातिर रोज नए-नए हथकंडे अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं और उनके खातों को खाली कर रहे हैं। लोग भी शातिरों के झांसे में आकर साइबर क्राइम का शिकार हो जाते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो किसी व्यक्ति या संस्थान का डाटा ब्रिच होने के पीछे ह्यूमन एरर प्रमुख वजह है। कई बार लोग साइबर फ्राड के लिए किसी का फोन अपनी समस्या बताकर लेने का प्रयास करते हैं, चाहे जितनी मर्जी रिक्वेस्ट अज्ञात व्यक्ति की ओर से की जाए, लेकिन किसी को यूज के लिए अपना फोन न दें, क्योंकि इससे आपका डाटा ट्रांसफर करके शातिर आपको चपत लगा सकते हैं।
कोई भी इंसान अपना टूथब्रश किसी से शेयर नहीं करता, तो ओटीपी जो कि 6 नंबर का होता है, उसे क्यों किसी से शेयर करना। यह बात रिजनल फारेंसिक साइंस लैब धर्मशाला की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. मीनाक्षी महाजन ने कही। डॉ. मीनाक्षी महाजन का कहना है कि जब आप अपना टूथब्रश किसी से शेयर नहीं करते तो ओटीपी क्यों किसी से शेयर करना। कई बड़े साइबर ठगी के मामले ओटीपी शेयर करने की वजह से भी सामने आए हैं। जागरूकता इससे बचने का एकमात्र उपाय है, ऐसे में सभी जागरूक होकर साइबर ठगी से बच सकते हैं। साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों पर डॉ. महाजन का कहना है कि जो रिपोर्ट साइबर क्राइम को लेकर सामने आ रही हैं, उसमें डाटा ब्रीचस का मुख्य कारण ह्यूमन एरर सामने आता है।
शातिर लोगों को फंसाने के कई प्रयास करते हैं और लोग उनके झांसे में आकर फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि यदि कोई आपको कॉल करके डाटा मांगता है तो कभी न दें, कई बार ऐसे भी आप साइबर ठगी का शिकार हो सकते हैं। कई बार देखा जाता है कि शातिर अर्जेंट कॉल का बहाना बनाकर सामने वाले व्यक्ति से किसी को कॉल करने के लिए फोन मांगने का नाटक करते हैं। बार-बार आग्रह करने के बावजूद किसी के हाथ में अपना मोबाइल न दें, क्योंकि कई बार देखा गया है कि शातिर आपके फोन से बार-बार कॉल करने का नाटक करके कॉल डाइवर्ट या डाटा ट्रांसफर कर लेते हैं, जिससे आप साइबर क्राइम का शिकार हो जाते हैं। शातिर कई हथकंडे अपनाते हैं कि आप अपना मोबाइल उसे दे दें, लेकिन कोई भी ऐसा न करे। इसके लिए जागरूकता जरूरी है।
