संजीव महाजन, नूरपुर: प्रदेश में 12 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में बात अगर हॉट सीट माने जाने वाली फतेहपुर विधानसभा की कि जाए तो यहां सीधा सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच होने जा रहा है। दोनों ही राजनीतिक दलों के प्रत्याशी यहां पर अपनी जीत के लिए पूरा दमखम लगा रहे हैं। वहीं भाजपा की ओर से इस बार इस सीट पर राकेश पठानिया उतारा गया है और उनका विधानसभा क्षेत्र बदला गया है, जबकि कांग्रेस की ओर से निवर्तमान विधायक भवानी पठानिया को चुनावी मैदान में उतारा गया है। फतेहपुर को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। वहीं इस गढ़ में सेंध लगाने के लिए जहां भाजपा अपनी पूरी ताकत लगा रही है। तो वहीं कांग्रेस ने भी जीत को लेकर ओर अपना वर्चस्व यहां कायम रखने के लिए पूरा जोर चुनाव प्रचार मैदान में लगाया है।
अगर हम 2019 के लोकसभा चुनावों की बात करें तो लगभग 75 प्रतिशत वोट शेयर भाजपा के नाम था। वहीं 2014 और 2009 में भी वोट शेयर लगभग 56 प्रतिशत का है। इन आंकड़ों के अनुसार कहा जा सकता है कि भाजपा का वोट शेयर इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस या अन्य के मुकाबले काफी काफी ज्यादा है। इस के बाद भी इस विधानसभा सीट में भाजपा के हार का कारण चुनावी समीक्षक भाजपा का एकजुट ना रहना बताते हैं,लेकिन इस बार हालात बिल्कुल ही बदल गए हैं। भाजपा पूरी तरह संगठित और एक दम नए कलेवर में दिखाई पड़ रही है।
टिकट घोषणा के दिन से लेकर अब तक भाजपा से उम्मीदवार राकेश पठानिया के साथ पूर्व प्रत्याशी बलदेव ठाकुर भी उसी जोश के साथ कंधे से कंधे मिलाए साथ ही दिखते हैं। इनके साथ ही भाजपा के वरिष्ठ नेता और किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष जगदेव ठाकुर जो की संगठन के पुराने खिलाड़ी है समय समय पर संगठन को निर्देशित कर रहे हैं और अपने सुझाव और चुनावी समझ से भाजपा का वोट एक कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर भाजपा के ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश ओबीसी वोटर्स के जनाधार को और भी पुष्ट करने में लगे हैं और उनके साथ भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज हैप्पी भी युवाओं के जोश को और भी बढ़ा रहे हैं।
ऐसे में जब जनता से मत जानने का प्रयास किया गया तो एक कांग्रेस समर्थक ने बताया कि बीते चुनावों में भाजपा की विफलता का एक मात्र कारण भाजपा का एकजुट ना होना था। अब जब भाजपा एक हो गई है तो कांग्रेस की लड़ाई इस बार बेहद मुश्किल है। राकेश पठानिया पूर्व में भी कद्दावर नेता के रूप में जाने जाते रहे हैं। इनका जनाधार इनके कामों और बातों को स्पष्ट रूप से रखने का है। इनको कमतर आंकना कांग्रेस के लिए चूक साबित होगी।
एक अन्य मतदाता रवि ने बातचीत में बताया कि पूर्व के कांग्रेस विधायक काफी प्रभावशाली व्यक्ति रहें पर फिर भी हम आज तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। ना बिजली की व्यवस्था ठीक है और ना पानी की। वर्तमान विधायक यहां अपनी सरकार ना होने के हवाला देते हैं। हमारे पास भाजपा के अलावा कोई विकल्प नहीं है। तीसरे विकल्प को लेकर हुई बातचीत में मतदाताओं ने सभी को सिरे से नकार दिया।
वहीं भाजपा समर्थकों से भी बात चीत में भाजपा युवा मोर्चा के पदाधिकारी संधू ने बताया कि भाजपा ने हमेशा मुद्दे और मिसालों की लड़ाई लड़ी है। मुद्दे जनसरोकारों के और मिसाल किए गए कामों के।
नूरपुर में विधायक रहने के दौरान हमारे फतेहपुर के प्रत्याशी पठानिया ने वहां के स्थानीय मुद्दों को प्रभावी तौर पर रखा और मिसाल के तौर नूरपुर में पुलिस जिला, मातृ शिशु अस्पताल, इंडोर स्टेडियम, दर्जनों पुल और सड़क, आउटडोर जिम सरीखे कार्यों का निर्माण करवाया है कुल मिलाकर 86388 वोटों के साथ 112 बूथों पर होने जाने वाला यह चुनावी मुकाबला अब महज भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सिमटता दिखाई पड़ रहा है।
