शिमला, 12 मार्च -: भारतीय जनता पार्टी ने जनजातीय मंत्री जगत सिंह नेगी के हालिया बयान को लेकर उनकी आलोचना की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नौतोड़ और जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार स्पष्ट समाधान देने में असफल रही है और अब इस विषय पर राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि नौतोड़ का मुद्दा पिछले दो दशकों से चर्चा में रहा है। वर्ष 2006 में कांग्रेस सरकार के दौरान ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि नौतोड़ की जमीन केवल भूमिहीन लोगों को ही दी जाएगी। उनका कहना है कि 1975 के अधिनियम में भूमिहीन की स्पष्ट परिभाषा दी गई थी और उसी के आधार पर यह शर्त लागू की गई।पार्टी के अनुसार वर्ष 2014 में कांग्रेस सरकार ने फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट, 1980 को आंशिक रूप से निलंबित करने की बात कही, लेकिन “लैंडलेस” की शर्त को नहीं हटाया गया। भाजपा का दावा है कि इस कारण वास्तव में किसी को भी नौतोड़ का लाभ नहीं मिल पाया।भाजपा नेताओं ने कहा कि वर्ष 2017 में जयराम ठाकुर के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार ने इस विषय का अध्ययन कर समाधान खोजने का प्रयास किया था, लेकिन उस समय फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण तत्काल निर्णय संभव नहीं हो पाया।
पार्टी ने यह भी कहा कि संविधान की पाँचवीं अनुसूची के तहत राज्यपाल को कुछ विशेष अधिकार जरूर प्राप्त हैं, लेकिन किसी केंद्रीय कानून को निलंबित करने की प्रक्रिया कानूनी और जटिल होती है। इसलिए इस विषय पर तथ्यों के साथ चर्चा होना जरूरी है।भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में जनजातीय क्षेत्रों के विकास से जुड़े बजट में भी कमी आई है। उनका कहना है कि पहले ट्राइबल सब प्लान के तहत लगभग 400 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जिसे घटाकर करीब 150 करोड़ रुपये कर दिया गया है।इसके अलावा पार्टी ने फॉरेस्ट राइट्स एक्ट (FRA) के तहत भूमि अधिकारों से जुड़े मामलों के निस्तारण की गति को भी धीमा बताया है। भाजपा का कहना है कि इन मुद्दों के समाधान के लिए राज्य सरकार को केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय बनाकर काम करना चाहिए।भाजपा नेताओं ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर ठोस पहल की जरूरत है, ताकि नौतोड़, फॉरेस्ट राइट्स और वाइब्रेंट विलेज जैसी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच सके।
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