चन्द्रिका – कालका शिमला रेलवे ट्रेक एक ऐतिहासिक धरोहर है, जिसका निर्माण कार्य ब्रिटिश काल मे हुआ। इस ट्रेक के निर्माण में ब्रिटिश काल के इंजीनियर भी मुश्किल में पड़ गए थे, लेकिन स्थानीय ग्रामीण बाबा भलकू जिनके नाम पर शिमला में एक संग्रहालय भी है उनकी मदद से इस ट्रेक का निर्माण कार्य पूरा किया गया था।
ट्रैक का निर्माण कार्य 1898 में हुआ था शुरू
कालका-शिमला रेलवे ट्रैक का निर्माण कार्य 1898 में शुरू हुआ था। जबकि इस ट्रेक पर ट्रेन की शुरुआत 9 नवंबर 1903 से हो गई थी। धर्मपुर में इस रेलवे ट्रैक का सबसे बड़ा पुल है। इस प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर एचएस हरिंगटन थे। इस ट्रैक पर 103 टनल है जिनमें से 1 अब फंक्शन में नहीं है। हर टनल से कुछ न कुछ किस्से जुड़े हैं। इसका सबसे बड़ा टनल बड़ोग है । बड़ोग का नाम चीफ इंजीनियर बड़ोग के नाम पर पड़ा है।
96 किलोमीटर तक की दूरी तय करने वाले इस रेलवे ट्रैक पर 800 ब्रिज से ट्रेनें गुजरती हैं । इस रेलवे लाइन को टॉय ट्रेन लाइन भी कहा जाता है। यहां पर चलने वाली ट्रेन एक घंटे में 22 किलोमीटर का सफर तय करती है।
कालका शिमला ट्रेक को बनाने में है ये रोचक किस्सा
कालका-शिमला रेलवे ट्रैक बिछाते वक्त पहाड़ियों के दो सिरों को सुरंगों से जोड़ने में मुश्किलें पेश आ रही थीं। कई बार की कोशिशों के बाद भी उन्हें जोड़ा नहीं जा सका था। बड़ोग दो छोरों को जोड़ने में फेल हो गए । जिसके बाद ब्रिटिश हूकूमत ने उन पर एक रुपये का फाइन लगा दिया। फाइन लगाने से आहत होकर बड़ोग ने खुदकुशी कर ली। जहां उन्होंने खुदकुशी की थी उस सुरंग को टनल-33 के नाम से जाना जाता है। यह टनल करीब 1143.61 मीटर लंबी है।
यह एक लंबे अरसे तक भारतीय रेलवे की दूसरी सबसे लंबी सुरंग बनी रही। यह एक सीधी सुरंग है जो पत्थरों को चीरकर बनाई गई है। इस रेलवे ट्रैक को पूरा कराने में एक स्थानीय ग्रामीण बाबा भलकू का बड़ा योगदान था। वे अनपढ़ थे लेकिन बिना किसी आधुनिक उपकरणों के महज एक छड़ी से एक अंग्रेज इंजीनियर को सुरंग मिलाने की राह दिखा दी थी। अंग्रेजों ने उन्हें पुरस्कार भी दिए थे, बाबा भलूक के नाम पर एक संग्रहालय भी बनाया गया है।
यूनेस्को ने दिया था हेरिटेज साइट का दर्जा
कालका शिमला रेलवे लाइन को यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल आर्गेनाईजेशन (UNESCO) ने साल 2008 में वर्ल्ड हिस्टोरिक साइट की सूची में शामिल किया था। हेरिटेज म्युजियम पूरे क्षेत्र के इतिहास की झलक दिखाता है।
