कुल्लू : मनमिंन्द्र अरोड़ा – हिमाचल के पहाड़ों पर इन दिनों जंगल बुरांस के फूलों से मनमोहक एवं आकर्षक बने हुए हैं। ऊंचाई के हिसाब से फरवरी, मार्च और अप्रैल महीने में खिलने वाले बुरांस के फूलों का इन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण लोग विभिन्न बीमारियों में औषधि के रूप में भी प्रयोग करते हैं। इसके अलावा बुरांस के फूल की तासीर ठंडी होने के कारण जूस भी बनाया जाता है।
जिला कुल्लू के जंगलों में बुरांस के फूलों से आई लाली ने आकर्षित करना शुरू कर दिया है। जिला की पार्वती व रूपी घाटी सहित अन्य स्थानों के जंगलों में बुरांस के पेड़ों में फूल दिखने लगे हैं और बुरांस के फूलों को जूस के लिए तोडऩे का काम भी शुरू हो गया है। कुल्लू में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और वन्य पौधों के अथाह भंडार मौजूद हैं। जिला में इन दिनों प्राकृतिक वन्य पौधे अपने पूरे यौवन पर हैं। इन्हीं पौधों में से एक पौधा बुरांस का भी है। यह पौधे जिला के दियार, सैंज, रैला, मणिकर्ण, बंजार, खराहल, बरशैणी, स्नोर घाटी आदि क्षेत्रों में बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है। इन दिनों बुरांस के पौधों में फ्लावरिंग का दौर चला हुआ है। लाल रंग के फूलों से घाटी के जंगल का नजारा सभी को आकर्षित कर रहा है। बुरांस के फूल अनेक औषधीय गुणों से भी भरपूर होते र्हैं। इसके अलावा इसका जूस व चटनी, जैम, सॉस भी बहुत ही स्वादिष्ट तथा औषधिय गुणों वाला होता है तथा बाजार में भी इसके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। इसका जूस अनेक प्रकार की बीमारियों को दूर करने में लाभदायक होता है।
इसके अलावा नाक से खून बहने पर भी बुरांश का जूस पीने से इस पर काबू पाया जा सकता है। बुरांस के महत्त्व को देखते हुए अब घाटी के ग्रामीण भी इसका उपयोग कर रहे हैं।
एचपीएमसी के केंद्र में भी तैयार किया जाता है बुरांस के फूल का जूस
भुट्टी में एच पी एम सी के केंद्र में तैनात अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि अब लोगों को इसके गुणों के संबंध में पूरी जानकारी मिलने लगी है तथा अब ग्रामीण इसके उत्पादों को बाजार में भी बेचने लगे हैं। वही एचपीएमसी के केंद्र में भी बुरांस के फूल का जूस तैयार किया जाता है और ग्रामीण भी यहां पर फूल का जूस तैयार करने के लिए आते हैं। बुरांस को रोहडोडैंडंोन आरबोरियम के नाम से जाना जाता है और हिमालयन क्षेत्र के वनों में अत्यधिक मात्रा में पाया जाता हेै। इससे लोगों को आय भी खूब होती है।
केंद्र में जूस तैयार करवाने पहुंची महिलाओ ने बताया कि उन्होंने हाल ही में बड़े स्तर पर बुरांश का जूस निकाला था और जूस को बाजार में अच्छे दाम प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि बुरांश का जूस चटनी, जैम, सॉस आदि बनाकर ग्रामीणों क्षेत्रों के लोग अपनी आमदनी भी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बाजार में बुरांस के उत्पादों की भारी मांग रहती है।
डायबिटीज के लिए भी उपयोगी
करीब 14 मीटर तक की लंबाई वाले ये वृक्ष ढलानदार भूमि में पाए जाते हैं। बुरांस के फूल देखने में जितने सुंदर होते हैं उतने ही स्वास्थ्यवर्द्धक भी हैं। हिमाचल में बुरांश के 3 प्रकार के फूल पाए जाते हैं, जिनमें गुलाबी, लाल और सफेद फूल लगते हैं, इनमें लाल फूलों का औषधीय महत्व अधिक माना जाता है। लोग इसे लिवर, किडनी रोग के अलावा खूनी दस्त व बुखार आदि के दौरान प्रयोग करते हैं। बुरांस के फूलों में मिथेनॉल होता है जो कि डायबिटीज के लिए भी उत्तम माना जाता है। इसके अलावा बुरांस के फूलों से जूस व चटनी भी बनाई जाती है।
