मंडी, धर्मवीर-:छोटी काशी के नाम से विख्यात हिमाचल प्रदेश का ऐतिहासिक शहर मंडी इन दिनों अपनी 500 वर्षों की स्वर्णिम यात्रा का जश्न मना रहा है। इसी ऐतिहासिक अवसर पर अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव का शुभारंभ पारंपरिक आस्था और भव्यता के साथ हुआ। सात दिवसीय इस देव महाकुंभ की शुरुआत पारंपरिक जलेब से हुई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर देव संस्कृति की अनूठी झलक पेश की।
महोत्सव का विधिवत उद्घाटन हिमाचल प्रदेश के डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने किया। उन्हें पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया, जिसके बाद उन्होंने ऐतिहासिक राज माधव राय मंदिर में पूजा-अर्चना की। यहीं से पहली पारंपरिक जलेब आरंभ हुई, जो पूरे शहर से होते हुए पड्डल मैदान में जाकर संपन्न हुई।जलेब के दौरान देवी-देवताओं के सजे-धजे रथ, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन और लोकनृत्य ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।स्थानीय देवलु अपने-अपने देव रथों के साथ नाचते-गाते आगे बढ़ते रहे। पारंपरिक वेशभूषा और रंग-बिरंगी पगड़ियों से सजी भीड़ ने इस आयोजन को और भी आकर्षक बना दिया। सड़कों के दोनों ओर खड़े हजारों दर्शक इस अद्भुत दृश्य के साक्षी बने।
पड्डल मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में डिप्टी सीएम ने कहा कि मंडी देवभूमि है और 500 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पूरी करना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र की व्यस्तता के कारण मुख्यमंत्री इस बार शामिल नहीं हो सके, लेकिन इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर उन्हें स्वयं को गौरवान्वित महसूस हो रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि 500 वर्षों के इस स्वर्णिम पड़ाव को वर्ष भर विभिन्न सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आयोजनों के माध्यम से मनाने की योजना बनाई जाएगी। भाषा एवं संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन के साथ मिलकर शहर की समृद्ध विरासत, लोकपरंपराओं और धार्मिक धरोहर को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने के प्रयास किए जाएंगे।
इस अवसर पर कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। महोत्सव के पहले ही दिन उमड़ा जनसैलाब इस बात का संकेत है कि छोटी काशी की देव संस्कृति आज भी लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है।
