मंजूर पठान, चंबा: अगर आप खूबसूरत शहर चंबा के दिल यानी चंबा के चौगान मैदान आना चाहते हैं तो अपना प्लान फिलहाल 15 दिसंबर से 15 अप्रैल के बीच ना बनाएं,वरना आपको निराशा हो सकती है। जी हां…ऐसा क्यों हो सकता है तो इसकी भी वजह हम आपको बताएंगे। बता दें कि चंबा के इस चौगान मैदान को जिला प्रशासन की ओर से 15 दिसंबर से लेकर अगले वर्ष 15 अप्रैल तक मरम्मत कार्य के चलते बंद किया जा रहा है। हर साल इस मैदान को कुछ माह के लिए इसके मरम्मत कार्य के चलते बंद कर दिया जाता है। इस बार इसके लिए प्रशासन ने दिसंबर से अप्रैल तक का समय निर्धारित किया है।
इस तय समय के बीच चौगान मैदान में हरी घास उगाई जाएगी और इसकी अन्य मरम्मत का कार्य भी पूरा किया जाएगा। इसी को ध्यान में रखते हुए चंबा जिला के उपायुक्त दुनी चंद राणा ने लोगों से प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है। उपायुक्त ने कहा हैं कि जब चौगान बंद रहता है तो चौगान में उगती हरी भरी घास से शहर की खूबसूरती ओर बढ़ जाती है। अब आपको इस चौगान मैदान के इतिहास से भी थोड़ा रूबरू करवा देते हैं। हिमाचल प्रदेश का चंबा शहर अपनी खूबसूरती के लिए विश्व भर में एक अलग पहचान रखता है। इस शहर की एक अलग पहचान है यहां का चौगान मैदान जो चंबा शहर के बीचो बीच स्थित है। यह चौगान मैदान चंबा का दिल बनकर धड़कता है। इस चौगान मैदान का इतिहास भी बेहद पुराना है।
चंबा में जब कभी राजाओं का राज हुआ करता था तो राजाओं के समय में इस चौगान की स्थापना हुई थी। खेल जगत के महान देश इंग्लैंड ने भी चंबा की चौगान में अपने जमाने में खूब क्रिकेट मैच खेले हैं। राजाओं के समय से ही यह चौगान मैदान खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। अब चंबा के इस ऐतिहासिक चौगान में हर साल अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का आयोजन होता है। उसके बाद कई तरह की खेल गतिविधियां भी इस मैदान में होती रहती है। इन सब गतिविधियों के बाद बात आती है इस चौगान मैदान को दोबारा सवारने की जिसके लिए चौगान को पांच माह के लिए बंद कर दिया जाता है। जब चौगान बंद रहता है तो इसमें हरी घास उगती है और इससे चंबा की खूबसूरती में चार चांद लग जाते है।
