सोलन/योगेश शर्मा: नगर निगम सोलन में कांग्रेस का कब्जा है लेकिन कांग्रेस पार्षदों और मेयर के बीच काफी समय से तनातनी चली हुई है। यहां तक कि कांग्रेस के 4 पार्षदों ने भाजपा के साथ मिलकर मेयर और डिप्टी मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया था। लेकिन नियमों के कारण वह इस लक्ष्य को हासिल नहीं कर सके। जिसके बाद चार पार्षदों , मेयर और डिप्टी मेयर के बीच की खाई और अधिक बढ़ गई। अब दो दिन पहले मेयर ने मीडिया के माध्यम से यह आदेश निकाल दिए कि पति पार्षद नगर निगम में न आ सकते है और न ही किसी कार्य को करवा सकते है।
इस आदेश को लेकर आज भाजपा पार्षदों ने , कांग्रेस में सुलग रही इस विरोध की चिंगारी पर आग डालने का काम किया और मेयर के इन आदेशों को असवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि नगर निगम एक सार्वजनिक स्थान है, यहां आने पर कोई भी रोक नहीं लगा सकता है और न ही नगर निगम के अधिकारियों ने कोई इस तरह का आदेश निकाला है।
मेयर के आदेशों के बाद नगर निगम सोलन में भाजपा के निशाने पर आई मेयर
इस बारे में नगर निगम सोलन के भाजपा पार्षद शैलेन्द्र गुप्ता और पूर्व पार्षद भरत साहनी ने कहा कि नगर निगम मेयर द्वारा मीडिया के माध्यम से जो तुगलकी फरमान जारी किया है, वह बर्दाश्त से बाहर है। आज वह पार्षद पतियों को बाहर का रास्ता दिखा रहे है , कल वह जनता को भी नगर निगम आने से मना कर देंगे। उन्होंने कहा कि यह आदेश गलत है और नियमों से बाहर है। इन आदेशों से पता चलता है कि कांग्रेस में काफी फूट पड़ चुकी है, लेकिन इस फूट का प्रभाव सोलन के विकास पर पड़ता नज़र आ रहा है। उक्त पार्षदों ने मेयर से निवदेन किया है कि वह इस तरह के आदेश न निकालें जिससे नगर निगम हास्य का कारण बने। उन्होंने कहा कि जब सभी को साथ लेकर चलेंगे तभी सोलन का विकास हो पाएगा।
