राहुल चावला,धर्मशाला: मेहर चंद महाजन एक ऐसी शख्सियत थे,जिनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। कुछ ही लोग आजादी से पहले पढ़े-लिखे हुआ करते थे, जिसमें सबसे ज्यादा शिक्षाविद के रूप में जस्टिस मेहर चंद महाजन का नाम जाना जाता हैं। यह शब्द मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को धर्मशाला के खनियारा में सीआईआई एमसीएम मल्टी ट्रेनिंग सेंटर में जस्टिस मेहर चंद महाजन की 133 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जस्टिस मेहर चंद महाजन की प्रतिमा का अनावरण भी किया। उन्होंने कहा कि जस्टिस मेहर चंद महाजन भारत के पहले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बने। जम्मू कश्मीर के प्रधानमंत्री के रूप में भी रहे और जम्मू कश्मीर के विलय के समय उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही हैं। उन्होंने कहा कि जस्टिस मेहर चंद महाजन का हिमाचल प्रदेश से अलग नाता रहा हैं। उनके पोते विवेक महाजन ने एक संस्थान की शुरुआत की है जहां करीब 200 के करीब गरीब बच्चे, बच्चियां पढ़ती हैं। उन बच्चों के लिए आज के भविष्य की चुनौतियों के लिए जो कोर्स हैं उनकी शुरुआत की गई हैं और इस क्षेत्र और कांगड़ा क्षेत्र के उत्थान के लिए उनके पोते विवेक महाजन लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जस्टिस मेहर चंद महाजन के योगदान को हम सदैव याद रखेंगे उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता हैं ।
