शिमला,संजु चौधरी(TSN)-मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने प्रदेश में बढ़ते नशे पर चिंता जताई है.नरेश चौहान ने कहा कि आज हिमाचल के गांव और छोटे कस्बों तक नशा पहुंच गया है.उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार नशे को रोकने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है.इस दौरान नरेश चौहान ने पूर्व जयराम सरकार पर निशाना साधा.उन्होंने कहा कि पूर्व जयराम सरकार के कार्यकाल में प्रदेश का समय खराब हुआ.नशे की रोकथाम के लिए पूर्व सरकार ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई.विपक्ष केवल सरकार को कोसने और गिराने में लग रहा.इस दौरान उन्होंने IGMC में इंजेक्शन न मिलने से कैंसर रोगी की मौत मामले को लेकर विपक्ष पर वोट बैंक की राजनीति के लिए गैर जिम्मेदाराना तरीके से प्रचारित करने का आरोप लगाया है.
प्रदेश के गांव-गांव तक फैला नशा पूर्व सरकार ने नहीं दिखाई गंभीरता
मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व जयराम सरकार के 5 साल के कार्यकाल में प्रदेश का केवल समय खराब हुआ.पिछली सरकार ने प्रदेश में नशा रोकने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई.जयराम सरकार के समय प्रदेश में खुलेआम शराब माफिया काम करता रहा.विपक्ष पर निशाना साधते हुए नरेश चौहान ने कहा की वर्तमान सरकार के दो वर्षों के समय में विपक्ष की भूमिका दुर्भाग्यपूर्ण रही है.विपक्ष केवल सरकार को गिराने और कोसने में लगा रहा.केंद्र से किसी मदद को दिलाने में विपक्ष ने कोई भूमिका नहीं निभाई.
ठियोग वाटर सप्लाई मामले में तुरंत कार्रवाई ने दिया प्रदेश को संदेश
हाल ही में ठियोग से सामने आए वाटर सप्लाई घोटाले मामले को लेकर नरेश चौहान ने कहा कि सरकार की नीति भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की है.उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में आते ही तुरंत कार्रवाई की गई.इससे प्रदेश भर में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की मंशा का संदेश गया है.वहीं कोऑपरेटिव बैंक लोन मामले में प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि सरकार का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है.यह बैंक के अपने अधिकार क्षेत्र का मामला है,बैंक के अपने नियम कानून है. ऐसे में बैंक अपने स्तर पर इस पूरे मामले को देखेगा.
IGMC अस्पताल में इंजेक्शन न मिलने के मामले में कहा ये
IGMC अस्पताल में इंजेक्शन न मिलने से कैंसर रोगी की मौत के मामले में मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि इस पूरे मामले में IGMC प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अपना स्पष्टीकरण दे दिया है.व्यक्ति को ढाई लाख रुपए की स्वास्थ्य सहायता दी गई थी.उन्होंने कहा कि व्यक्ति कैंसर का रोगी था और उसकी मौत दुखद है. लेकिन गैर जिम्मेदारी के साथ राजनीतिक लाभ के लिए इस मामले का दुष्प्रचार करना दुर्भाग्यपूर्ण है.सरकार की मंशा परिवार को इंजेक्शन नहीं देने की कतई नहीं थी.विभाग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि इंजेक्शन अस्पताल में उपलब्ध नहीं रहता आवश्यकता पर मंगवाया जाता है.विपक्ष सोशल मीडिया पर पब्लिसिटी और वोट बैंक के लिहाज से इसको प्रसारित कर रहा है यह सरासर गलत है.
