शिमला-: जिला परिषद शिमला के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह सिसोदिया ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा करने का आरोप लगाया है। शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से 26 सितंबर को जारी स्पष्टीकरण के बाद राजनीतिक दलों को पूरे तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर अपनी बात जनता के सामने रखनी चाहिए।सिसोदिया ने कहा कि हाल में सामने आई मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयोग के भीतर कुछ प्रक्रियाओं को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख किया गया था। इसके बाद आयोग की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने स्पष्टीकरण के बावजूद अपनी आपत्तियां कायम रखी हैं, ऐसे में पूरे मामले पर सार्वजनिक बहस तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं से सवाल करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन गंभीर आरोपों के लिए आधिकारिक दस्तावेज, सत्यापित तथ्य और कानूनी आधार सामने रखना भी उतना ही आवश्यक है।
SIR को लेकर तथ्यात्मक चर्चा की जरूरत
सिसोदिया ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) जैसी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूचियों की समीक्षा और उन्हें अद्यतन करना है। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न हो और पूरी प्रक्रिया कानून के अनुरूप तथा पारदर्शी तरीके से संचालित हो।उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में मतदाता सूची की शुद्धता और दूरदराज के क्षेत्रों तक निर्वाचन तंत्र की पहुंच महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों, दुर्गम इलाकों, वरिष्ठ नागरिकों, प्रवासी कामगारों और अन्य पात्र मतदाताओं को निर्वाचन प्रक्रिया में समान अवसर मिलना चाहिए।सिसोदिया ने कहा कि यदि कांग्रेस SIR या किसी अन्य चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाती है तो उसे ठोस तथ्य और कानूनी आधार भी जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक आरोपों के बजाय प्रमाणित जानकारी के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।
आंतरिक पत्राचार को लेकर पूरे रिकॉर्ड पर चर्चा की जाए
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के आंतरिक प्रशासनिक पत्राचार और आयोग के अंतिम नीतिगत या आधिकारिक निर्णयों के बीच अंतर किया जाना जरूरी है। उनके अनुसार, हालिया मीडिया रिपोर्टों और आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण को एक साथ देखकर ही पूरे मामले को समझा जाना चाहिए।सिसोदिया ने कहा कि किसी भी संस्थागत प्रक्रिया के एक हिस्से को अलग करके राजनीतिक निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड को सार्वजनिक बहस का आधार बनाया जाना चाहिए।
सिसोदिया ने जून 2024 में राहुल गांधी की ओर से EVM को लेकर दिए गए बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को चुनाव सुधार और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे उठाने का अधिकार है, लेकिन ऐसी बहस तकनीकी तथ्यों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि चुनावी व्यवस्था को लेकर जनता के बीच विश्वास बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों और संबंधित संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है।सिसोदिया ने राहुल गांधी से जुड़े वर्ष 2019 के सुप्रीम कोर्ट मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं और न्यायपालिका से संबंधित राजनीतिक बयानों में विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि राफेल मामले में “चौकीदार चोर है” टिप्पणी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जोड़ने को लेकर राहुल गांधी ने बाद में सर्वोच्च न्यायालय में बिना शर्त माफी मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी माफी स्वीकार करते हुए अवमानना की कार्यवाही बंद कर दी थी और भविष्य में अधिक सावधानी बरतने की बात कही थी।
विकास और जनहित के मुद्दों पर जवाब मांगा
सिसोदिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता के सामने रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, ग्रामीण विकास और आर्थिक स्थिति से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से इन क्षेत्रों में अपनी उपलब्धियों और भविष्य की कार्ययोजना को जनता के सामने रखने की मांग की।
