शिमला, संजू-: नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने के कारण पार्टी में हताशा और निराशा बढ़ गई है और इसी वजह से वह संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर देश में अव्यवस्था का माहौल बनाने का प्रयास कर रही है।जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस के नेता एक ओर संविधान की प्रति हाथ में लेकर देशभर में घूमते हैं और संसद में भी संविधान की शपथ लेते हैं, लेकिन दूसरी ओर संविधान के तहत गठित संस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाते हैं। उनके अनुसार, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को सार्वजनिक करना और प्रमाण प्रस्तुत करना जरूरी है।उन्होंने राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी।
जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस अब प्रस्तुतियों और पावरपॉइंट के माध्यम से अपने आरोपों को जनता के सामने रख रही है। उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल को लेकर भी कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार को लेकर पत्र पर दी सफाई
जयराम ठाकुर ने चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट का हवाला देते हुए कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किसी तरह का असहमति पत्र नहीं था। उनके मुताबिक, पत्र चुनाव आयोग की किसी नीति या एसआईआर जैसी प्रक्रिया के विरोध में नहीं, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से संबंधित था।उन्होंने राहुल गांधी द्वारा एक अंग्रेजी समाचार पत्र के हवाले से किए गए दावों को भी खारिज किया और कहा कि इन दावों का तथ्यात्मक आधार स्पष्ट होना चाहिए। जयराम ठाकुर ने कांग्रेस से चुनाव आयोग से जुड़े आरोपों पर दस्तावेज और प्रमाण सार्वजनिक करने को कहा।
पूर्व चुनाव आयुक्तों के फैसलों का किया उल्लेख
जयराम ठाकुर ने कांग्रेस शासन के दौरान चुनाव आयोग से जुड़े कुछ पूर्व अधिकारियों के बाद के राजनीतिक और संवैधानिक पदों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आर.के. त्रिवेदी 1982 से 1985 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे और बाद में गुजरात के राज्यपाल बने। उन्होंने रमा देवी का भी उल्लेख किया और कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर थोड़े समय रहने के बाद उन्हें हिमाचल प्रदेश और फिर कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया।उन्होंने टी.एन. शेषन और एम.एस. गिल के कार्यकाल का भी जिक्र किया। जयराम ठाकुर ने कहा कि एम.एस. गिल चुनाव आयोग से सेवानिवृत्ति के बाद कांग्रेस में शामिल हुए, राज्यसभा पहुंचे और केंद्र सरकार में मंत्री रहे। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले राजनीतिक दलों को अपने इतिहास पर भी नजर डालनी चाहिए।
1991 के चुनावों का उठाया मुद्दा
जयराम ठाकुर ने 1991 के लोकसभा चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय चुनाव चार चरणों में प्रस्तावित थे और दो चरण पूरे हो चुके थे। 20 मई को मतदान के बाद 21 मई की रात राजीव गांधी की हत्या हुई। इसके बाद शेष दो चरणों के मतदान की तारीखें आगे बढ़ा दी गईं।उन्होंने दावा किया कि मतदान टाले जाने की अवधि के दौरान देश में अलग-अलग स्थानों पर राजीव गांधी के अस्थि कलश जुलूस निकाले गए और इससे चुनावी माहौल प्रभावित हुआ। जयराम ठाकुर ने चुनाव परिणामों के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि हत्या से पहले और बाद में हुए मतदान के परिणामों में कांग्रेस के प्रदर्शन में बड़ा अंतर दिखाई दिया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को चुनावी प्रक्रिया के संदर्भ में चर्चा का विषय बताया।
‘वोट चोरी’ के आरोपों पर कांग्रेस से सवाल
वोट चोरी के आरोपों को लेकर भी जयराम ठाकुर ने कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा केंद्र की सत्ता में 2014 में आई, जबकि कांग्रेस कई राज्यों में दशकों से सत्ता से बाहर है। उन्होंने ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में कांग्रेस लंबे समय से सरकार बनाने की स्थिति में नहीं रही है।उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस को चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका थी तो इन राज्यों में लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहने के दौरान उसने इस मुद्दे को उसी तरह क्यों नहीं उठाया। हालांकि, इन राजनीतिक दावों के साथ-साथ चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की जांच और प्रमाण का महत्व भी उन्होंने रेखांकित किया।
हिमाचल में प्रदर्शन को लेकर भी निशाना
हिमाचल प्रदेश में चुनाव आयोग के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर जयराम ठाकुर ने कांग्रेस नेताओं पर कड़ा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग के कार्यालय के बोर्ड पर कालिख पोती गई और पुतले के साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल, उपमुख्यमंत्री और मंत्री भी शामिल हुए। जयराम ठाकुर ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं से संवैधानिक संस्थाओं के प्रति मर्यादा बनाए रखने की अपेक्षा होती है।उन्होंने कथित तौर पर चुनाव आयोग को आग लगाने संबंधी बयान का भी जिक्र किया और कहा कि इसी चुनाव आयोग द्वारा घोषित परिणामों के आधार पर कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई है। ऐसे में संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाने के बजाय लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए।
SIR को लेकर भी कांग्रेस पर आरोप
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध को लेकर जयराम ठाकुर ने कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाए।उन्होंने आरोप लगाया कि SIR का विरोध करने के पीछे कांग्रेस का उद्देश्य ऐसे लोगों को मतदाता सूची में बनाए रखना है, जिनकी नागरिकता या पात्रता पर सवाल हैं।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे का उल्लेख करते हुए कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों से सवाल किया कि अलग-अलग राज्यों में इस विषय पर उनके रुख में अंतर क्यों दिखाई देता है।उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और पात्रता की जांच लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।जयराम ठाकुर ने कहा कि चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय राजनीतिक दलों को तथ्यों और दस्तावेजों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों को प्रमाणित करने और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति मर्यादा बनाए रखने की अपील की।

