संजु चौधरी, शिमला: देश में केंद्र सरकार की ओर से लागू की जा रही नीतियों का विरोध सीपीआईएम की ओर से जताया जा रहा हैं। मंगलवार को भी सीपीआईएम ने केंद्रीय कमेटी के आवाह्न पर मोदी सरकार की ओर से लागू की जा रही नीतियों के खिलाफ प्रदेश में धरना प्रदर्शन किया। सीपीआईएम ने बढ़ती बेरोजगारी, गरीबी, मंहगाई के विरोध में 22 फरवरी से 28 फरवरी तक राज्यव्यापी अभियान चलाया था जिसके समापन पर 28 फरवरी को जिला, उपमंडल, ब्लॉक व तहसील स्तर पर प्रदर्शन किए गए। शिमला में भी उपायुक्त कार्यालय के बाहर भी सीपीआईएम ने जोरदार प्रदर्शन किया गया।
सीपीआईएम नेता संजय चौहान ने कहा कि 2014 के बाद बीजेपी की मोदी सरकार सत्ता में से देश में बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई, असमानता बढ़ी हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था का लड़खड़ाना जारी है ओर मंदी की हालत और तीव्र हो रही हैं। सरकार की इन नीतियों से अमीर और अमीर और गरीब और गरीब हुआ हैं। मोदी सरकार की नीतियों के चलते देश में बेरोजगारी बढ़ी हैं। देश में बेरोजगारी की दर 7 प्रतिशत से ऊपर ही रही है और शहरी बेरोजगारी की दर तो 8 से 10 प्रतिशत के बीच रही हैं।
वर्ष 2023- 24 के बजट में मनरेगा व खाद्य सब्सिडी में भारी कटौती की गई हैं। जहां वर्ष 2021- 22 में मनरेगा पर 1,25,000 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे वहीं इस वर्ष के बजट में मात्र 60000 करोड़ रूपए का प्रवधान किया गया हैं। बजट में खाद्य सब्सिडी पर भी 90000 करोड़ रुपए की कटौती की गई हैं बाजार में रसोई गैस,खाद्य वस्तुओं व अन्य आवश्यक वस्तुओं ओर दवाओं के दामों में भारी वृद्धि हो रही हैं। बढ़ती महंगाई से जनता की परेशानी बढ़ गई हैं।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार कॉरपोरेट घरानों व अमीरों को टैक्स में लाखों करोड़ रुपए की छूट दे रही हैं। जिससे देश की जनता में असमानता बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल संपत्ति का 40 प्रतिशत से अधिक का स्वामित्व आबादी के मात्र 1 प्रतिशत हिस्से के पास हैं। उन्होंने कहा की अगर मोदी सरकार महंगाई, बेरोजगारी को बढ़ाने वाली इन नीतियों को वापस नहीं लेती है तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
