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हिमाचल में बिजली बोर्ड के निजीकरण के खिलाफ CPI(M) का मोर्चा, भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर प्रदर्शन तेज

Chandrika
Chandrika 2 Min Read
Updated 2025/08/05 at 8:47 PM
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Shimla, Sanju –हिमाचल प्रदेश में बिजली बोर्ड को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है। मंगलवार को CPI(M) ने शिमला स्थित कुमार हाउस बिजली बोर्ड कार्यालय के बाहर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। पार्टी ने सरकार पर बोर्ड के निजीकरण की साज़िश रचने और अधिकारियों के भ्रष्टाचार में लिप्त होने के गंभीर आरोप लगाए।

CPI(M) के जिला सचिव विजेंद्र मेहरा ने कहा कि बिजली बोर्ड के यूनियन नेताओं को चार्जशीट, निलंबन और तबादलों के जरिए प्रताड़ित किया जा रहा है क्योंकि वे प्रबंधन में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर कर रहे हैं और कर्मचारियों की लंबित मांगों को उठाने का साहस दिखा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह सब संविधान के अनुच्छेद 19 और ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है।उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगाने की योजना दरअसल निजीकरण की दिशा में एक चाल है। लगभग 2000 करोड़ रुपए की इस योजना में 1000 करोड़ रुपए फिजूल खर्च किए जा रहे हैं, जबकि राज्य पहले से ही 125 यूनिट मुफ्त बिजली दे रहा है।

CPI(M) ने रखी ये मांगें:

  • सभी चार्जशीट, निलंबन और ट्रांसफर को तुरंत रद्द किया जाए।
  • गेट मीटिंग, धरना और रैली पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं।
  • भ्रष्ट अधिकारियों को बोर्ड से हटाया जाए।
  • कर्मचारियों की मांगों पर तुरंत कार्रवाई की जाए।

बोर्ड के कर्मचारी और पेंशनर पहले ही 7 अगस्त को बड़े आंदोलन की घोषणा कर चुके हैं, और अब CPI(M) के समर्थन से इस आंदोलन को और ताकत मिलती दिख रही है।

विजेंद्र मेहरा, जिला सचिव, CPI(M)

“हम लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क पर उतरे हैं। बोर्ड में भ्रष्टाचार चरम पर है और सरकार उसे निजी हाथों में सौंपने की साजिश कर रही है। हम इसका डटकर विरोध करेंगे।”

TAGGED: Shimla CPI(M) Protest
Chandrika August 5, 2025
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