संजु चौधरी,शिमला(TSN): हिमाचल हाईकोर्ट में चल रहे मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति मामले में प्रदेश सरकार को एक बड़ा झटका लगा हैं। यह झटका प्रदेश सरकार को हाई कोर्ट की ओर से दिए गए फैसले के चलते लगा है जिसमें कोर्ट ने बीजेपी की ओर से सीपीएस नियुक्ति मामले में दायर की गई याचिका को मेंटेनेबल बताया हैं। भाजपा के विधायक सतपाल सत्ती की ओर से सीपीएस की नियुक्ति को चुनौती देने वाले मामले पर कोर्ट में मंगलवार को ही यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया हैं।
भाजपा की वरिष्ठ नेता एवं विधायक सतपाल सती ने अतिरिक्त महाधिवक्ता पंजाब हरियाणा सतपाल जैन , वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुश दास, अधिवक्ता वीरभादुर वर्मा ,अंकित धीमान, मुकुल शर्मा और राकेश शर्मा के माध्यम से हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी।
फैसले के बारे में मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा विधायकों के केस से जुड़े वकील वीर बहादुर वर्मा ने बताया की हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में फैसले के लिए जो आवेदन वर्तमान सरकार ने किया था कोर्ट ने उसे ख़ारिज कर दिया हैं ओर इसमें हमारे पक्ष में फैसला आया हैं। उन्होंने बताया कि सीपीएस की नियुक्तियों को लेकर सतपाल सत्ती एवं 11 अन्य विधायकों ने उच्च न्यायालय में इनकी नियुक्ति को चुनौती दी थी पिछली बार 3 अक्टूबर को मुद्दा कोर्ट के समक्ष लगा था जिसमें लंबी बहस हुई थी, जिसका आज फैसला आया है। इस फैसले में साफ है की याचिका मेंटेनेबल है मतलब आगे बढ़ाने योग्य हैं।
16 अक्टूबर को उच्च न्यायालय में यह याचिका फिर लगी है जिसमें हमने अंतरिम निवेदन किया हैं। उन्होंने कहा कि अब सवाल यह उठता है कि अंतरिम निवेदन में क्या होगा? अगर उनकी नियुक्ति पर रोक लगती है तो यह एक बड़ा फैसला माना जाएगा। उन्होंने कहा कि हमने पहले भी स्पष्ट किया है कि यह सरकारी खजाने का मामला है और इसको लेकर भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला पूर्व में भी सुनाया हैं। सर्वोच्च न्यायालय का कानून, भूमि का कानून माना जाता हैं।
उन्होंने बताया कि असम और मणिपुर में भी इस मामले को लेकर पूर्व में फैसला सुनाया जा चुका है और सर्वोच्च न्यायालय मानता है कि उनकी नियुक्ति और संवैधानिक हहैं। आज की फैसले के बाद हमारी याचिका का पहला पड़ाव पर हो चुका हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने आवेदन में विधायकों के 12 शपथ पत्र की अधिकारिता पर सवाल उठाए थे हमने वह सभी 12 शपथ पत्र कोर्ट को दे दिए हैं।
वकील वीर बहादुर वर्मा ने कहा कि यह मामला अनियमितता का था ना की अवैधता का था और हम बताना चाहेंगे की अनियमितता का मामला सुधार योग्य होता है। उन्होंने कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि हम इस केस में मजबूती के साथ आगे बढ़ रहे हैं और हमारे हाथ मजबूत हैं। 16 अक्टूबर को या तो कोर्ट फैसला सुनाएगी या इसे रिजर्व रख दिया जाएगा।
