मंडी,धर्मवीर(TSN)-आधुनिकता के इस दौर में अब बैलों के माध्यम से खेतों को जोतने का प्रचलन समाप्त हो चुका है। ऐसे में पशुपालक अब उस तकनीक की तरफ बढ़ रहे हैं जिससे उनकी गाय गर्भाधान के बाद सिर्फ बछड़ी को ही जन्म दे।पशुपालकों की इसी मांग को ध्यान में रखते हुए अब उन्हें विभाग के माध्यम से सेक्सड सीमन स्ट्रॉ का टीका मुहैया करवाया जा रहा है।हालांकि इस टीके में गर्भाधान की संभावना कम रहती है लेकिन गर्भाधान हो जाने पर 90 प्रतिशत संभावना बछड़ी पैदा होने की ही रहती है।इस बात का प्रमाण राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आंकड़े देते हैं।
मंडी जिला में जागरूक पशुपालक इसी टीके की कर रहे हैं मांग
मंडी जिला पशुपालन विभाग के उप निदेशक डा.अतुल पुरी ने बताया कि अब पशुपालकों को उनकी डिमांड के हिसाब से सेक्सड सीमन स्ट्रॉ का टीका मुहैया करवाया जा रहा है।मंडी जिला को ऐसे 7 हजार टीके प्राप्त हुए हैं जिनमें से 5 हजार टीके फिल्ड में भेजे जा चुके हैं और उसमें से 3 हजार टीके लगाए भी जा चुके हैं। इनमें से 224 मामलों में ही गर्भाधान हुआ है जिसमें से सिर्फ 18 बछड़े और बाकी बछड़ियां पैदा हुई हैं। डा. पुरी ने स्पष्ट किया कि इन टीकों में गर्भाधान की संभावना काफी कम रहती है और मंडी जिला में अभी तक गर्भाधान के 23 प्रतिशत मामले ही सामने आए हैं।
पशुपालकों को 125 रूपए में दिया जा रहा है 1250 रूपए का टीका
डा.अतुल पुरी ने बताया कि इस टीके की कीमत 1250 रूपए है। प्रदेश सरकार इसे 1250 रूपए में खरीदती है लेकिन पशुपालकों को यह टीका मात्र 125 रूपए में मुहैया करवाया जा रहा है।इसमें केंद्र और प्रदेश सरकारों की सब्सिडी मिलाने के बाद इसके दामों में आम पशुपालकों के लिए तय किया गया है।उन्होंने बताया कि जागरूक पशुपालक इस टीके की तरफ अधिक अग्रसर हो रहे हैं। 500 और टीकों की डिमांड भेजी जा चुकी है जबकि 500 टीकों की और डिमांड भेजी जा रही है।यह टीके सिर्फ पशु चिकित्सालयों में ही उपलब्ध हैं क्योंकि इन्हें डॉक्टर या फिर विशेषज्ञ फार्मासिस्ट द्वारा ही लगाया जाता है। अधिकतर टीके जर्सी गाय की नस्ल के ही हैं क्योंकि पशुपालक इसकी ही ज्यादा डिमांड करते हैं। इसके अलावा साहिवाल और एचएफ नस्ल के टीके भी विभाग के पास उपलब्ध हैं।
भविष्य में आवारा पशुओं से भी मिल सकती है निजात
बता दें कि मौजूदा समय में सड़कों पर जो आवारा पशु नजर आते हैं उनमें 70 से 80 प्रतिशत संख्या बैलों की ही है। क्योंकि लोगों ने बैलों को पालना बंद कर दिया है जिस कारण उन्हें सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। लेकिन जिस तरह से पशुपालक अब सिर्फ बछड़ियों वाला टीका ही लगा रहे हैं तो उससे भविष्य में आवारा पशुओं की संख्या में भी कमी आने की उम्मीद लगाई जा सकती है।
