Hamirpur, Arvind-:प्रदेश में हाल के समय में बढ़ रही जातीय भेदभाव की घटनाओं के विरोध में शोषण मुक्ति मंच ने मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय हमीरपुर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। मंच के कार्यकर्ताओं ने न केवल प्रदेश सरकार बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ भी नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के लिए बनाए गए विभिन्न कल्याणकारी प्रावधानों में लगातार कटौतियां हो रही हैं, जिससे समुदाय के युवाओं और गरीब परिवारों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
प्रदर्शन के दौरान मंच के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में दलितों के साथ अत्याचार और भेदभाव की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है। नेताओं ने रोहड़ू में 12 वर्षीय बच्चे द्वारा जातीय भेदभाव से आहत होकर आत्महत्या करने और सैंज में दलित महिला की हत्या जैसी घटनाओं को उदाहरण के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि इन मामलों ने प्रदेश ही नहीं, पूरे देश में दलितों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि देशभर में दलित समुदाय पर होने वाले हमलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे समाज में असुरक्षा की भावना गहरी होती जा रही है। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा दलित छात्रों की छात्रवृत्ति में की गई भारी कटौती का भी उन्होंने कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति राशि को घटाकर लाखों में सीमित कर दिया गया है, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा।शोषण मुक्ति मंच ने इस स्थिति को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि दलित समुदाय को अपने अधिकारों और सुरक्षा के लिए सड़क पर उतरकर आवाज बुलंद करनी पड़ रही है। इसी के तहत हमीरपुर में यह विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया और डीसी के माध्यम से प्रदेश सरकार को विस्तृत ज्ञापन भेजा गया।
इस अवसर पर संगठन के कई नेता मौजूद रहे। हिमाचल भवन एवं अन्य निर्माण मजदूर संघ के राज्य अध्यक्ष जोगिंदर कुमार ने कहा कि प्रदेश सहित पूरे देश में दलितों पर बढ़ते अत्याचारों के कारण समुदाय में असंतोष बढ़ रहा है। छात्रवृत्ति फंड में कटौती और जातीय भेदभाव के मामलों ने प्रशासन और सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, इसलिए सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए।
