राहुल चावला, धर्मशाला: आज देशभर में धन्वंतरि दिवस बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन जहां नए-नए उपहार समेत बर्तन, सोने-चांदी खरीदने की परंपरा है तो वहीं भगवान को भी याद किया जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान धन्वंतरि का प्रादुर्भाव बताया जाता है। भगवान धन्वंतरि औषधियों के प्रणेता माने जाते है। इसी कड़ी में आयुष विभाग धर्मशाला की ओर से आज धर्मशाला में हवन यज्ञ करके भगवान धन्वंतरि को याद किया गया और भविष्य में आयुष विभाग फले-फूले इसके लिए भी आशीर्वाद लिया गया।
इस बाबत जानकारी देते हुए आयुष विभाग की जिला अधिकारी डॉ. अंजलि ने बताया कि सनातन धर्म संस्कृति के मुताबिक पुराणों काव्यों में भगवान धन्वंतरि का स्पष्ट शब्दों में वर्णन किया गया है कि जब समुद्र मंथन हुआ था उस वक्त सबसे पहले समुद्र से कलश लेकर भगवान धन्वंतरि ही पैदा हुए थे। उस वक्त उनके हाथ में अमृत का कलश था। उन्होंने बताया कि आज आर्युवेद की जितनी भी हर्बस औषधियां हैं वो सब इन्हीं की देन मानी जाती है, इसलिए उन्हें हर साल धनतेरस पर भव्य तौर तरीकों से याद किया जाता है।
डॉक्टर अंजली ने बताया कि आयुर्वेद विभाग का स्लोगन है सर्वे भवंतु सुखिना सर्वे शंतु निरामया, कि हर लोग सुखी और संपन्न हो तो उसी के मद्देनजर आय़ुर्वेदा डे देशभर में मनया जाता है, और संसार भी सुखी रहे ऐसी कामना की जाती है। कार्यक्रम में तिब्बतियन आयुष विभाग के निदेशक और तिब्बतियन आय़ुष कॉलेज के प्रिंसिपल ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। आयुर्वेद में हर जगह भववान धन्वंतिर को ही प्रणेता माना जाता है इसिलए उन्होंने भी यहां आकर शिरकत करते हुए इस दिन को बड़े हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया।
