शिमला, 20 फरवरी -:भारत तेजी से डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। मोबाइल फोन, ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, सोशल मीडिया और डिजिटल सरकारी सेवाओं ने जीवन को आसान और तेज बना दिया है।
आज बिल भुगतान से लेकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और व्यापार संचालन तक अधिकांश कार्य ऑनलाइन माध्यम से हो रहे हैं। लेकिन जहां तकनीक सुविधा देती है, वहीं जोखिम भी बढ़ाती है। अपराध की दुनिया भी अब डिजिटल हो चुकी है।अब अपराधी ताले नहीं तोड़ते, बल्कि मोबाइल कॉल, फर्जी लिंक, ईमेल और सोशल मीडिया संदेशों के जरिए लोगों को निशाना बनाते हैं। यही बदलाव पारंपरिक बीट पुलिसिंग से “बिट पुलिसिंग” की ओर संक्रमण को दर्शाता है, जहां नागरिकों की सुरक्षा केवल सड़कों तक सीमित नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म तक विस्तारित हो गई है।
हिमाचल प्रदेश जैसे शांत राज्यों में भी साइबर अपराध के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है। यह संकेत है कि इंटरनेट के युग में कोई भी क्षेत्र सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। साइबर अपराध अब संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित हो रहे हैं। अपराधी चोरी किया गया डेटा खरीदते हैं, तकनीकी उपकरणों का उपयोग करते हैं और योजनाबद्ध तरीके से धोखाधड़ी करते हैं।डीपफेक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने खतरे को और गंभीर बना दिया है। “डिजिटल अरेस्ट” जैसे मामलों में अपराधी खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर लोगों को डराते हैं और पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं। यह समझना जरूरी है कि कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए धन की मांग नहीं करती।साइबर अपराध भावनाओं और विश्वास का दुरुपयोग करता है। फर्जी निवेश योजनाएं, नौकरी के झांसे, ओटीपी साझा कराने की कोशिश और यूपीआई फ्रॉड आम हो चुके हैं। ऐसे मामलों में समय पर शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी है, क्योंकि त्वरित कार्रवाई से धन की रिकवरी संभव हो सकती है।
कानूनी स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 जैसे प्रावधान नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। साथ ही भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने निजता को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी है।डिजिटल सुरक्षा के लिए मजबूत पासवर्ड, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण, संदिग्ध लिंक से दूरी और व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सतर्कता बेहद जरूरी है। साइबर सुरक्षा केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि साझा दायित्व है। सजग नागरिक ही डिजिटल सीमाओं की सबसे मजबूत रक्षा पंक्ति हैं। क्लिक करने से पहले सोचें और किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत रिपोर्ट करें।
Chandrika
