नाहन/देवेन्द्र कुमार: सिर्फ तुमसे ही फासले निकले, वरना सबसे राब्ते निकले.., हमसे इकरार हो नहीं पाया, दूध के हम जले हुए निकले.., युवा शायर जावेद उल्फत की इस गजल ने महफिल में खूब वाह वाही लूटी। मौका था रश्मि प्रकाशन साहित्यिक संस्था नाहन की ओर से शहर में आयोजित जिला स्तरीय कवि सम्मेलन का। इस सम्मेलन में दो दर्जन कवियों ने कविता पाठ किया। मंच संचालन में भुवन जोशी ने चार चांद लगाए। महिला कवि विजय रानी बंसल ने हर तरफ बस आदमी आया नजर, न हमें कोई यहां इन्सां मिला.., सरला गौतम ने खुशियों को मैने मन में लिख डाला.., शबाना सैय्यद ने बंधी है हाथों में सभी के घड़ियां.., कविता पेश की।
भुवन जोशी ने रंग नहीं, उमंग नहीं, उल्लास नहीं कोई, ऐसे जीवन में तो विश्वास नहीं कोई.., से रंग जमाया। सुनीता भारद्वाज ने मुझे अनजान लोगों से कभी भी डर नहीं लगता.., धनवीर सिंह परमार ने केवट में हौंसला हो तो राम चले आते हैं.., डा. राजन कौशल ने भीगी हुई ऊपर से नीचे, पानी टप टप करता था, टूटी चप्पल एक हाथ में, पांव से खून निकलता था.., से तालियां बटोरीं। दीन दयाल वर्मा ने पर्वत पर न बदली बरसी, मधुर स्वपन में नदी खोई, जंगल बहुत जोर से रोया, जवान पेड़ कटा जब कोई.., से प्रकृति के विनाश कर दर्द प्रकट किया।
दीप चंद कौशल ने कब रोक सकी हैं बाधाएं, एकलव्य से वीरों को, अंगूठा कट जाने पर भी उंगलियों से छोड़ता तीरों को.., माजरा से आई शबनम शर्मा ने नहीं खिलनी मुझे कविता.., प्रभात कुमार ने पीले को नीला कहते, गजब तुम्हारी खुराफात है.., सैनवाला से आए वरिष्ठ कवि चिर आनंद ने लोहे की दीवार मैं शीशे से तोड़ दूं.., सारे जहां के दर्द मैं पीलूं निचोड़ दूं.., अनमोल शर्मा रतन ने माना की तैयार नहीं हूं मैं, यकीन मानो बेकार नहीं हूं मैं.., डा. राम गोपाल वर्मा ने सुगंध ही सुगंध बिखरी है हर उपवन.., कविता पेश की। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ महिला कवि शबनम शर्मा ने की। जबकि दीप चंद कौशल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
