धर्मशाला, राहुल-: हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) के आठ होटलों को निजी हाथों में सौंपने के सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ निगम कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को प्रदेशभर से आए एचपीटीडीसी कर्मचारियों ने धर्मशाला स्थित निगम मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर सरकार के फैसले का विरोध जताया। कर्मचारियों ने कहा कि एचपीटीडीसी के होटल प्रदेश की अमूल्य धरोहर हैं और इन्हें किसी भी सूरत में निजी हाथों में नहीं सौंपा जाना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम कर्मचारी संघ, भारतीय मजदूर संघ से संबंधित संगठन के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में कर्मचारियों ने सरकार से निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिन आठ होटलों को ऑपरेट, मेंटेन और वैल्यू (ओएनवी) आधार पर निजी क्षेत्र को सौंपने की तैयारी की जा रही है, वे सभी निगम की आय के प्रमुख स्रोत हैं।कर्मचारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष शशी पाल शर्मा ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में इस मुद्दे को लेकर आंदोलन का निर्णय लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की यह पहल पर्यटन निगम को धीरे-धीरे कमजोर करने की दिशा में कदम है। शर्मा ने कहा कि यदि इस वर्ष आठ होटल निजी हाथों में दिए गए तो भविष्य में और अधिक होटलों का निजीकरण किया जा सकता है, जिससे निगम का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।उन्होंने कहा कि निगम प्रबंधन स्वयं 110 करोड़ रुपये से अधिक के टर्नओवर का दावा कर रहा है, ऐसे में लाभकारी होटलों को निजी हाथों में सौंपने का औचित्य समझ से परे है। उनका कहना था कि इस निर्णय का असर केवल कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि निगम के अधीन संचालित होटल प्रबंधन संस्थानों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं के रोजगार अवसरों पर भी पड़ेगा।प्रदर्शन के बाद कर्मचारी संघ ने निगम के प्रबंध निदेशक के माध्यम से प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजकर आठों होटलों को निजी हाथों में न सौंपने की मांग की। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
