राहुल चावला, धर्मशाला: भारत चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद लगातार इस मामले में चीन की खिलाफत हो रही है। भारत चीन सीमा के तंवाग इलाके में भारत चीन के सैनिकों के बीच हुई इस झड़प की चिंगारी कहीं न कहीं हिमाचल प्रदेश की दूसरी राजधानी धर्मशाला के ग्लोबल सिटी मैकलोड़गंज तक भी पहुंच गई है।
यहां गुरुवार को चीन की ख़िलाफ़त के विरोध में ओर भारतीय सेना के जवानों की हौसला अफजाई के लिए निर्वासित तिब्बतियन संगठनों और स्थानीय जनता ने सड़क पर निकलकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में निर्वासित तिब्बतियन के पांच गैर सरकारी संगठन और एक इंडो तिब्बतियन फ्रैंडशिप एसोसिएशन ने साथ मिलकर मैकलोड़गंज चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया।
इस दौरान उन्होंने चीन की विस्तारवादी नीतियों का पुरजोर विरोध किया और तिब्बत की आजादी, भारत की सुरक्षा जैसे नारे लगाकर भारत सरकार का भी समर्थन किया। इस दौरान इन तिब्बतियन संगठनों के पदाधिकारियों में से रिंजन और गुमु टुंडू ने कहा कि चीन के किसी भी सहयोग से दुनिया के हर देश को बचना चाहिए। चीन हमेशा अपनी विस्तारवादी नीति के लिए जाना जाता है और वो हमेशा पीठ के पीछे से वार करने के लिए मशहूर हैं। मगर फिर भी भारत की सेना ने उनको हमेशा मुंहतोड़ जबाव दिया हैं।
उन्होंने कहा कि अबकी बार भी भारतीय सैनिकों ने उन्हें अपनी सीमा से पीछे धकेल दिया हैं। मगर चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा इसलिए उसका हर स्तर पर विरोध होना बेहद जरूरी हैं।
