राहुल चावला,धर्मशाला(TSN): देश प्रदेश में त्योहारी सीजन शुरू हो चुका हैं। त्योहारी सीजन में मिठाइयों की ज्यादा डिमांड रहती है, लेकिन बाजार में बिकने वाली मिठाइयां कितनी खरी हैं, इसकी जांच को लेकर फूड एंड सेफ्टी विभाग ने कमर कस ली हैं। जिला कांगड़ा की बात करें तो यहां पालमपुर, कांगड़ा, ज्वालामुखी और नूरपुर स्वीटस हब हैं, जहां से अधिकतर क्षेत्रों में मिठाइयों की सप्लाई की जाती हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में मिठाइयों की जांच के लिए फूड एंड सेफ्टी विभाग की ओर से दो फूड सेफ्टी ऑफिसर के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया हैं।
इस वर्ष अक्टूबर माह तक विभाग 470 सेंपल मिठाइयों के ले चुका है, जिनमें स्टैंडर्ड सही न पाए जाने पर 5 लाख से अधिक का जुर्माना भी वसूल किया जा चुका हैं। मिठाइयों के सेंपल फेल होने पर फूड सेफ्टी एसिस्टेंट कमीशनर की ओर से 1 लाख 25 हजार, जबकि एडीएम जो कि एग्जीक्यूटिव ऑफिसर होते हैं, उनकी ओर से 4 लाख रुपये का जुर्माना किया गया हैं।
डिपार्टमेंट आफ हेल्थ सेफ्टी एंड रेगुलेशन की एसिस्टेंट कमीशनर (फूड सेफ्टी) जिला कांगड़ा सविता ठाकुर ने कहा कि त्योहारी सीजन में फूड एंड सेफ्टी विभाग का मिठाइयों पर फोकस रहता हैं। विभाग के जिला में दो फूड सेफ्टी ऑफिसर हैं, जिन्हें 35-35 सेंपल का टारगेट दिया जाता हैं। त्योहारी सीजन में सेंपलिंग का टारगेट डबल कर दिया जाता हैं। जनवरी से अक्टूबर तक इस वर्ष 470 के करीब सेंपल लिए जा चुके हैं, सेंपल फेल होने पर फूड सेफ्टी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती हैं।
इस वर्ष एडीएम कांगड़ा की ओर से सेंपल फेल होने पर करीब 4 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा चुका हैं। वहीं एसिस्टेंट कमीशनर फूड सेफ्टी की ओर से 1 लाख 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा चुका हैं। बता दें कि छोटे कारोबारियों पर एसिस्टेंट कमीशनर फूड सेफ्टी के पास अधिकतम 1 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान हैं। वहीं एग्जीक्यूटिव ऑफिसर यानी एडीएम की ओर से अधिकतम 3 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान हैं। बड़े व्यापारी और होलसेलर, मेनुफेक्चरर संबंधी मामले एडीएम के पास जाते हैं।
एसिस्टेंट कमीशनर ने बताया कि त्योहारी सीजन के दौरान तेल और घी की जांच के लिए मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन के माध्यम से सेंपल लेकर स्पॉट पर ही उसका एनालिसिस किया जाता हैं। कलरफुल मिठाइयों में कलर को लेकर एक मामला सामने आया था, जिसमें दुकानदान ने एफएसएसएआई से एपू्रव को कलर को मिठाई बनाने में प्रयोग न करके डाई में प्रयोग होने वाले कलर का इस्तेमाल किया था, ऐसा एक मामला कोर्ट में चल रहा हैं।
