बिलासपुर,सुभाष ठाकुर(TSN)-जिला प्रशासन ने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से एक नई योजना शुरू की है।पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस योजना को जिला के दो प्रमुख स्कूलों—राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक छात्र और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या पाठशाला बिलासपुर—में लागू किया गया है।योजना के तहत उपायुक्त बिलासपुर ने इन दोनों स्कूलों को गोद लिया है।छठी कक्षा के विद्यार्थियों को एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग के माध्यम से पढ़ाया जाएगा।यह मॉडल आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा से प्रेरित है।यदि यह प्रोजेक्ट सफल होता है तो इसे जिले के अन्य स्कूलों में भी लागू किया जाएगा।
योजना को सफल बनाने के लिए अध्यापकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा।इसके अलावा,आवश्यक सामग्री और गतिविधियों के लिए ₹2.45 लाख का बजट निर्धारित किया गया है।योजना के अगले चरण में अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी स्कूलों को गोद लेंगे और बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करेंगे। योजना के तहत प्रत्येक कक्षा में 6 मेज और 4-5 कुर्सियां लगाई गई हैं।विद्यार्थी समूह में बैठकर पढ़ाई करेंगे और दिए गए विषयों को आपस में सुलझाएंगे।हर मेज के पास एक बोर्ड रखा गया है,जिस पर विद्यार्थी अपनी गतिविधियों को रिकॉर्ड करेंगे।जब तक विद्यार्थी एक कांसेप्ट को समझ नहीं लेते,तब तक वे अगले स्तर पर नहीं जाएंगे। अध्यापक केवल निगरानी करेंगे।
एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से सीखने की प्रक्रिया में शामिल
यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत लागू की गई है,जो विद्यार्थियों के कौशल विकास और समग्र शिक्षा को बढ़ावा देती है।एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से सीखने की प्रक्रिया में शामिल करती है। यह बच्चों में जिज्ञासा,आलोचनात्मक सोच और रचनात्मकता को बढ़ावा देती है।प्रशासन को उम्मीद है कि यह योजना बच्चों की समझने की शक्ति को बढ़ाएगी और उन्हें विषयों को गहराई से समझने में मदद करेगी।यह लर्निंग मैथेडोलॉजी बच्चों को न केवल यथार्थवादी समस्याओं का हल ढूंढने में सक्षम बनाएगी,बल्कि उनकी शब्दावली और ज्ञान को भी मजबूत करेगी।योजना के तहत हर अधिकारी को स्कूल गोद लेने की जिम्मेदारी दी गई है।वे समय-समय पर स्कूल जाकर बच्चों को प्रेरित करेंगे।यह पहल शिक्षण प्रक्रिया को एक नई दिशा देने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
