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Reading: खेतों से थाली तक – मोटे अनाज और प्राकृतिक खेती से सेहत और समृद्धि
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Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal > Blog > himachal > खेतों से थाली तक – मोटे अनाज और प्राकृतिक खेती से सेहत और समृद्धि
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खेतों से थाली तक – मोटे अनाज और प्राकृतिक खेती से सेहत और समृद्धि

Chandrika
Chandrika 2 Min Read
Updated 2025/09/25 at 3:40 PM
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Kangra, Sanjeev –हिमाचल प्रदेश और फतेहपुर विधानसभा में प्राकृतिक खेती और मोटे अनाज न सिर्फ किसानों की आमदनी का जरिया बन रहे हैं, बल्कि ये क्षेत्रीय परंपरा और स्वस्थ जीवनशैली को भी नई पहचान दे रहे हैं। कम लागत, बेहतर उत्पादन और पोषक तत्वों से भरपूर ये फसलें मिट्टी और जल संरक्षण के साथ-साथ उपभोक्ताओं तक शुद्ध और पौष्टिक भोजन पहुंचा रही हैं। किसानों की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए उम्मीद की नई किरण है।”

फतेहपुर विधानसभा के करीब 124 किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं। आत्मा परियोजना के कृषि प्रसार अधिकारी विशाल शर्मा बताते हैं कि मक्की, गेहूं, हल्दी, बाजरा, रागी और जौ जैसी पारंपरिक फसलें कम पानी और उर्वरक में भी आसानी से उगाई जा सकती हैं। ये फसलें बच्चों के लिए कैल्शियम और महिलाओं के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का खजाना हैं। खास बात यह है कि इन उत्पादों की बिक्री अब प्रदेश के डिपिओ और संबंधित विभागीय कार्यालयों में भी शुरू हो गई है।

हिमाचल और फतेहपुर विधानसभा के किसान प्राकृतिक खेती और मोटे अनाज से प्रदेश की तस्वीर बदल रहे हैं। खेतों से थाली तक, यह पहल सेहत, पोषण और समृद्धि का संदेश दे रही है। सरकार भी किसानों को बढ़ावा दे रही है और न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है – मक्की के लिए 40 रुपये प्रति किलो, गेहूं के लिए 60 रुपये, हल्दी के लिए 90 रुपये और पांगी क्षेत्र की जौ के लिए 60 रुपये। किसान इन फसलों से आटा, कुकीज़ और दलिया बनाकर अतिरिक्त आमदनी भी कमा रहे हैं।कम पानी, कम लागत और पोषण से भरपूर उत्पादन – यही प्राकृतिक खेती और मोटे अनाज की असली ताकत है। यह पहल सिर्फ परंपरा को जीवित नहीं रख रही, बल्कि किसानों के लिए स्थायी आमदनी और उपभोक्ताओं के लिए सेहतमंद विकल्प भी सुनिश्चित कर रही है। MSP ने किसानों की आमदनी को सुरक्षित और मजबूत बनाया है।

TAGGED: Kangra natural farming
Chandrika September 25, 2025
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