चन्द्रिका : भारत देश की समृद्ध संस्कृति यहां की पहचान है। देश मे अलग अलग वेशभूषा व भाषा अनेकता में एकता की झलक है। विभिन्न राज्यों में अपनी अपनी संस्कृति के अनुसार पहनावा भी है। बात करे हिमाचली टोपी की तो इसे अब देश विदेश में भी पहचान मिल रही है। परंपरागत रूप से, सर्द हवाओं से बचाने के लिए पहनी जाने वाली ये रंगीन टोपियां राज्य के सांस्कृतिक अस्तित्व में राज्य का प्रतीक बन गयी हैं। इसे प्रदेश के पहाड़ी इलाको में विशेष तौर पर विवाह समारोह में पहना जाता है। जिस तरह देश के अन्य राज्यों में पगड़ी सिर की शान मानी जाती है, वैसे ही हिमाचली टोपी भी सिर की शान मानी जाती है। वहीं अब इसे देशभर में भी खूब पसन्द किया जा रहा है। यही नहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी हिमाचली टोपी खूब पसंद आई और वे अपने कई कार्यक्रमो के दौरान भी इसे पहने नजर आ चुके है।राजनीति से लेकर बॉलीवुड में भी हिमाचली टोपी के कई लोग कायल है। ऐसे में अब ये एक तरह से फैशन का रूप भी ले रही है।
हिमाचल की राजनीति का हिस्सा भी बनी टोपी
हिमाचल प्रदेश में हिमाचली टोपी भी राजनीति का हिस्सा रह चुकी है। इसमे हरे रंग की टोपी को कांग्रेस से जोड़ा जाता था। जबकि मेहरून रंग कि हिमाचली टोपी भाजपा की पहचान बन गई थी। हालाकि अब टोपी के रंग को लेकर राजनीति काफी बदल गई है। इसका रूप अब हिमाचल की शान हिमाचली टोपी बन गई है। इसे अब बतौर फैशन भी लोग पसन्द कर रहे है।
