राहुल चावला,धर्मशाला: बेमौसमी वर्षा से प्रदेश में फसलों को जो पहुंचा हैं और इससे किसानों को जो हानि पहुंची हैं उसका आंकलन राजस्व विभाग की ओर से किया जा रहा हैं। इस नुकसान के आधार पर ही किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। यह बात कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रोफेसर चंद्र कुमार ने चौधरी ने शनिवार को सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में प्राकृतिक एवं जैविक खेती पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह के दौरान अपने संबोधन में कही।
सम्मेलन में देश भर से 250 कृषि विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने भाग लिया।
कृषि विश्वविद्यालय में “पारिस्थितिक, आर्थिक और पोषण सुरक्षा के लिए प्राकृतिक और जैविक खेती“ पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन भारतीय जैविक कृषि सोसायटी एवं नाहेप कास्ट परियोजना की ओर से संयुक्त रूप में किया गया। इस अवसर पर कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय सम्मेलन में वैज्ञनिकों ने क्या सुझाव दिए है उन पर विचार किया जाएगा।उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से अनुसंधान को प्रयोगशाला से खेत पर लाने का आह्वान किया ताकि किसानों को आर्थिक रूप में सुदृढ़ किया जा सकेगा।
कृषि मंत्री ने “पारिस्थितिक, आर्थिक और पोषण सुरक्षा के लिए प्राकृतिक और जैविक खेती“ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि देशभर से जैविक खेती के क्षेत्र में विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और चिकित्सकों के ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान होने से कृषि और किसानों को बहुत अधिक लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्र कृषि वैज्ञानिकों की नर्सरी हैं। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों ने देश की कृषि की दिशा और दशा बदलने में सराहनीय प्रयास किए हैं।
उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या में खाद्यानों की उपलब्धता कृषि वैज्ञानिकों के समुख बड़ी चुनौती है और प्राकृतिकओर जैविक खेती के माध्यम से खाद्यानों की मांग को पूरा करने की दिशा में विशेष प्रयास करने की जरूरत हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि ओर किसानों के उत्थान और उन्हें सुदृढ़ करने के लिये वचनबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि कृषि, बागवानी और पशुपालन विकास सरकार की विशेष प्राथमिकता है और इन क्षेत्रों के विकास के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों की मृदा परीक्षण पर विशेष ध्यान देने की बात करते हुए कहा कि जलवायु एवं वातावरण के अनुरूप किसानों भगवानों को कृषि के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
इससे पहले चौधरी सरवन कुमार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच के चौधरी ने मृदा के सेहत पर ध्यान देने को आवश्यकता पर बल देने की बात कही। सम्मान समारोह में विशेष अतिथि के रूप में वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय उत्तराखंड के कुलपति डॉ. परमिंदर कौशल उपस्थित रहे। उन्होंने आयोजकों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय सम्मेलन की बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन की सीधा लाभ किसानों को प्राप्त होगा।
इस अवसर पर विभिन्न सत्रों में आई संतुतिओं को प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पोस्टर प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। सम्मेलन में कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. डी के वत्स, सम्मेलन के संयोजक व अनुसंधान निदेशक डॉ. एस पी दीक्षित, आयोजन सचिव डाक्टर जनार्दन सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक डाक्टर रणवीर राणा, डॉ. गोपाल कतना उपस्थि रहे ।
