संजीव महाजन,नूरपुर: हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है लेकिन आज के समय में लोग गायों को जहां खुले में दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ रहे हैं। तो वहीं उनके मरने के बाद भी उन्हें सम्मानजनक तरीके से ना दबा कर खुले में जहां- तहां फेंका जा रहा है। ऐसा ही मामला डमटाल विकासखंड इंदौरा के तहत पड़ते डमटाल ठाकुर राम गोपाल मंदिर की गौशाला में सामने आया है। यहां गायों को मरने के बाद खुले में फेंका जा रहा है, जिससे कि स्थानीय लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि जब भी कोई गाय गौशाला में मर जाती है तो गौशाला की कर्मचारी उस गाय को खुले में फेंक देते हैं जिससे कि इलाका निवासियों को दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। लोगों ने बताया कि आए दिन इस गौशाला में 4 से 5 गाय मरती है जिनको कर्मचारी खुले में फेंक देते है। गांव की महिला ने कहा कि हमारे यहां इतनी गंदी बदबू आ रही है जिसकी वजह से बिमारियां फैलने का खतरा भी हो सकता है। यहां मर गई गायों को खुले में फैंक दिया गया जिसकी बदबू के चलते हम ना दिन को ना ही रात को घर या बाहर बैठ सकते है। घर में भी मास्क डाल कर रहना पड़ रहा है।
गौशाला वाले अकसर यह मानने से इंकार कर देते हैं कि यह फैंकी गई गाय उनकी गौशाला की है जबकि गौशाला के अंदर भी मृतक गाए पड़ी है। गांव वालों ने प्रशासन से गुजारिश कि है कि इस विषय पर गंभीरता से कदम उठाया जाए। गांव वालों की मांग है कि अगर कोई गाय मर जाती है तो उसे दफनाया जाए ताकि उसकी बदबू ना फैले।
