कुल्लू /मनमिन्दर अरोड़ा: हिमाचल प्रदेश में 12 नवंबर को मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई और यहां पर सभी प्रत्याशियों के द्वारा विकास के भी बड़े-बड़े दावे भरे गए। जनता ने भी प्रत्याशियों के दावों पर विकास की बात पर भरोसा किया और प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम मशीनों में कैद कर दी गई। लेकिन धरातल पर सच्चाई आज कुछ और ही है। आज भी कई गांव ऐसे हैं जो सड़क सुविधा के लिए जूझ रहे हैं। सड़क न होने का खामियाजा उन्हें बीमारी के समय भुगतना पड़ रहा है और ऐसे में मरीज के परिजन उन्हें आज भी पालकी में ढोने पर मजबूर है।

ये है मामला
ऐसा ही मामला कुल्लू ज़िला के अंतर्गत आने वाली सैंज घाटी की गाड़ापारली पंचायत में सामने आया है। बनाउगी गांव के 62 वर्षीय बुजुर्ग मनी राम की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने पहले घरेलू उपचार से ही दर्द ठीक करने का प्रयास किया। लेकिन तेज बुखार के चलते मनी राम की हालत गंभीर हो गई। इसके बाद परिजनों व ग्रामीणों ने हौसला दिखाते हुए कुर्सी पर ही दो डंडों के सहारे मरीज को सात किमी दूर जंगला बिहाली में पहुंचाया। यहां से मरीज को वाहन के माध्यम सैंज अस्पताल ले गए। जहां पर उनका उपचार चल रहा है। सड़क न होने के चलते बारिश के बीच फिसलन भरे रास्ते से परिजनों को मरीज को कुर्सी पर उठाना पड़ा। हर बार यहां के ग्रामीणों को इस तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है। बनाउगी गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया है। मजबूरी में लोग मरीजों को पीठ व चारपाई पर उठाकर सड़क तक लाने के लिए मजबूर हैं।

सड़क होती तो गाड़ी में इलाज करवाने के लिए जाता
उपचार के लिए लाए गए बुज़ुर्ग का कहना है कि सड़क ना होने के चलते आज मुझे दुसरो के कंधे पर इलाज के लिए जाना पड़ रहा है। अगर आज हमारे गांव सड़क से जुड़े होते तो में गाड़ी में इलाज करवाने के लिए जाता।

