Shimla, 1 August-शिमला से जारी बयान में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन के चलते हिमाचल आज गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। सरकार की नाकामियों पर माननीय उच्च न्यायालय को यह कहना पड़ा कि प्रदेश में आर्थिक आपातकाल लगाने की नौबत क्यों न आए। यह स्थिति सरकार की विफलता और गलत नीतियों का स्पष्ट प्रमाण है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर बनी सुक्खू सरकार ने मित्रों को लाभ पहुँचाने के अलावा प्रदेश हित के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। प्रदेश हित के मुद्दों पर यह सरकार हमेशा चुप्पी साध लेती है, जबकि ठेकेदारों के भुगतान से लेकर आम जनता तक हर कोई सरकार की अनदेखी का शिकार हो रहा है।उन्होंने कहा कि ठेकेदार लगातार बकाया भुगतान न मिलने से आंदोलन और विरोध कर रहे हैं। कई बार धरने, प्रदर्शन और यहां तक कि आत्महत्या जैसे प्रयास तक सामने आए, लेकिन सरकार ने समस्या का समाधान करने के बजाय सिर्फ झूठ बोलकर मामले को टालने का काम किया। अब न्यायालय में तथ्यों के आधार पर सरकार की सच्चाई सामने आ गई है।
प्रदेश को कर्ज और अव्यवस्था की ओर धकेल रही है सुक्खू सरकार
नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल को आपदा राहत के लिए लगातार सहयोग कर रही है। 2023 की आपदा के लिए केंद्र से 5150 करोड़ रुपये की मदद दी गई और 93 हजार प्रधानमंत्री आवास भी स्वीकृत किए गए। इसके बावजूद प्रदेश की कांग्रेस सरकार प्रभावित परिवारों तक राहत पहुँचाने में असफल रही है। न तो वादे पूरे हुए और न ही केंद्र की मदद का सही इस्तेमाल हो पाया।जयराम ठाकुर ने कहा कि आज की स्थिति में यह स्पष्ट है कि सुक्खू सरकार प्रदेश को विकास की राह से भटकाकर अव्यवस्था, कर्ज और बदहाली की ओर धकेल रही है।
