मंत्री ने बताया कि कुल्लू के पारंपरिक मफलर को आधुनिक डिजाइनों में ढालकर अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में निर्यात किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय बुनकरों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे वे वैश्विक मांग के अनुरूप अपने उत्पादों को तैयार कर सकें। उन्होंने कहा कि हिमाचल के शिल्प उत्पाद न केवल पूर्णतः हस्तनिर्मित हैं, बल्कि इनमें पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक धरोहर की झलक भी है, जो इन्हें ‘हेरिटेज’ उत्पाद का दर्जा देती है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि इन विशिष्ट उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच मिल सके और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में पर्यटन के विकेंद्रीकरण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि हस्तशिल्प व हथकरघा उत्पादों को पर्यटन से जोड़कर गांवों को भी पर्यटन के नक्शे पर लाया जा सकता है।
एमएसएमई मंत्रालय द्वारा आयोजित इस एक्सपो में देश के विभिन्न राज्यों से 48 उद्यमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में धर्मपुर विधायक चन्द्रशेखर, पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सोहन लाल ठाकुर, एपीएमसी मंडी अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, प्रदेश कांग्रेस महासचिव चम्पा ठाकुर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
