Chamba, Manjur Pathan-:चंबा जिला के पहाड़ी क्षेत्रों में सेब बागवानी स्थानीय लोगों की आय का प्रमुख स्रोत रही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदलते जलवायु परिस्थितियों और पुराने हो चुके पेड़ों की कम उत्पादकता ने बागवानों की आर्थिकी पर असर डालना शुरू कर दिया है। इसी स्थिति को देखते हुए उद्यान विभाग बागवानों को आधुनिक तकनीक से तैयार किए गए सेब के पौधे उपलब्ध करवाने के लिए विशेष पहल कर रहा है, ताकि उनका उत्पादन और आय दोनों बढ़ सकें।
उद्यान विभाग के अनुसार परंपरागत सेब की किस्मों से अब पहले जैसी फसल नहीं मिल रही। पुराने पेड़ उम्रदराज होने के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं और संक्रमण को भी ज्यादा झेल रहे हैं, जिसके कारण उनकी उत्पादन क्षमता काफी कम हुई है। इसलिए बागवानों के लिए जरूरी है कि वे समय के साथ बदलाव करें और पुराने पेड़ों की जगह नई तकनीक से विकसित किए गए उच्च उत्पादन क्षमता वाले पौधों को अपनाएं। विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीक आधारित पौधे न केवल जलवायु के अनुरूप बेहतर ढलाव रखते हैं, बल्कि उनकी फसल भी गुणवत्तापूर्ण और अधिक मात्रा में होती है।
उद्यान विभाग ने बागवानों से आग्रह किया है कि वे अगले सीज़न के लिए समय रहते अपनी डिमांड विभाग को भेजें ताकि उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध करवाए जा सकें। विभाग द्वारा बागवानी में सुधार के लिए कई नई किस्में, उच्च घनत्व वाले पौधे, उन्नत ग्राफ्टिंग तकनीक और वैज्ञानिक तरीके से विकसित पौध सामग्री तैयार की जा रही है, जो बागवानों के लिए अत्यंत लाभदायक साबित हो सकती है।
उद्यान विभाग चंबा के उप निदेशक डॉ. प्रमोद शाह ने कहा कि बागवान तभी आर्थिक रूप से मजबूत हो सकते हैं जब वे समय के साथ नई तकनीक अपनाने को तैयार हों। उन्होंने बताया कि विभाग के पास आधुनिक तकनीक से तैयार पौधों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। बागवान पुराने और कम उत्पादन वाले पेड़ों को हटाकर नई किस्मों के पौधे लगाएं, जिससे भविष्य में अधिक उत्पादन और बेहतर आय संभव हो सके। डॉ. शाह ने आश्वासन दिया कि बागवानों की डिमांड के अनुसार सभी पौधे समय पर उपलब्ध करवाए जाएंगे।
