भावना शर्मा,शिमला(TSN) : हिमाचल प्रदेश में अब आप आम के पेड़ के साथ ही पाजा- बान और रीठा, तूणी, रीठा सहित त्रियांबल के पड़े नहीं काट सकेंगे। इन प्रजाति के पेड़ों को काटने पर प्रदेश सरकार की ओर से पूर्ण तरीके से प्रतिबंध लगा दिया गया हैं। इन पेड़ों को काटना पूरी तरह से गैर कानूनी होगा। अगर किसी को इन पेड़ों को काटना है तो उसके लिए वन विभाग की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
यह फैसला प्रदेश सरकार की ओर से लिया गया हैं और इस बाबत अधिसूचना भी जारी कर दी गई हैं। प्रदेश में अवैध कटान और कीमती लकड़ी की तस्करी को रोकने की दिशा में सरकार की ओर से यह कदम उठाया गया हैं। सरकार अपने इस फैसले के तहत वन माफिया पर रोक लगाना चाहती हैं। यही वजह भी है कि सरकार ने राज्य के बाहर किसी भी प्रजाति की इमारती लकड़ी और ईंधन की लकड़ी को ले जाने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया हैं।
प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि इन छह प्रजातियां को वन विभाग के 10 वर्षीय कटान कार्यक्रम के तहत लाया गया हैं। उन्होंने बताया कि इन प्रजाति के पेड़ों को केवल वन विभाग के अनुमति के बाद ही काटा जा सकता है हालांकि नियमों के तहत घरेलू कार्यों के लिए एक वर्ष में अधिकतर पांच पेड़ों को काटने की अनुमति भी प्रदान की गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से प्रदेश में वनों के अवैध कटान पर रोक लगेगी तो वहीं राज्य की विविधता को बचाने में भी यहां फैसला कारगर साबित होगा।
बता दें कि राज्य सरकार ने किस्म के पेड़ों में से 6 किस्म के पेड़ों को काटने पर रोक लगाई हैं,तो वहीं वन विभाग ने 13 प्रजातियों के पेड़ों की एक संशोधित सूची भी जारी की है जिन्हें वन परिक्षेत्राधिकारी को सूचना देने के बाद काटा जा सकता हैं। वहीं जिन प्रजातियों के पेड़ों के कटान पर रोक लगाई गई हैं उनके लिए वन विभाग की अनुमति अनिवार्य होगी।
