मनाली (एकता): हिमाचल में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे ही कई क्षेत्रों में लोगों की चुनौती भी बढ़ रही हैं। पहाड़ी राज्य में सर्दी के मौसम ने दस्तक दे दी है। दरअसल जनजातीय विधानसभा क्षेत्र लाहौल स्पीति, भरमौर व किन्नौर में कभी भी भारी बर्फबारी का दौर शुरू हो सकता है। जिसके चलते चुनाव पर भी असर पड़ सकता है। 1998 में भी बर्फबारी ने चुनावों में खलल डाला था। जिसके चलते मई महीने में चुनाव करवाने पड़े थे। हिमाचल के यह क्षेत्र ही बर्फबारी के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। विधानसभा क्षेत्र लाहौल-स्पीति में नवंबर में चुनाव करवाना इतना आसान नहीं है। बता दें कि नवंबर महीने में इस शीत मरुस्थल में भारी बर्फबारी होती है।

लाहैल-स्पीति में यह दर्रा बन रहा लोगों के लिए रुकावट
लाहौल-स्पीति में घाटी की बात की जाए तो अटल टनल रोहतांग अब यहां के लोगों के लिए वरदान साबित हुई है। लेकिन बर्फबारी होने से घाटी में अभी भी दिक्कत होती है। स्पीति घाटी कुंजुम दर्रे पर बर्फबारी होने से कट जाती है।
12 हजार फीट की ऊंचाई पर है कई मतदान केंद्र
लाहौल-स्पीति विधानसभा क्षेत्र की सीमाएं चंबा के पांगी से चीन सीमा को छूती हैं। स्पीति में दुनिया का सबसे ऊंचा 15256 फीट ऊंचा टशीगंग मतदान केंद्र है। स्पीति के अधिकतर मतदान केंद्र 12 हजार फीट की ऊंचाई पर ही स्थित हैं। जिससे लोगों को मतदान करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
मतदान में कोई रुकावट न आए आयोग ने की है तैयारी
प्रदेश में मतदान में कोई रुकावट न आए चुनाव आयोग ने उसके ही तैयारी कर ली है। बर्फबारी के बीच भी एयर टैक्सी से लेकर जेसीबी मशीनरी का विकल्प रखा गया है। इस महीने लाहौल-स्पीति में सबसे बड़ी चुनौती मतदान कराने की रहेगी। लाहौल में 24744 मतदाता हैं।
