शिमला-: अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने कमला नेहरू अस्पताल (KNH) की प्रस्तावित शिफ्टिंग को लेकर प्रदेश सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति की राज्य अध्यक्ष रंजना जरेट और राज्य महासचिव फालमा चौहान ने कहा कि अस्पताल की शिफ्टिंग का मामला अभी माननीय उच्च न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद सरकार द्वारा नई समिति गठित करना यह दर्शाता है कि वह पहले से गठित समिति की रिपोर्ट की अनदेखी कर रही है।
समिति ने कहा कि पूर्व समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि आईजीएमसी में पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण कमला नेहरू अस्पताल के गायनी एवं प्रसूति विभाग को वहां स्थानांतरित करना व्यावहारिक नहीं है। वर्तमान में भी आईजीएमसी में गायनी ओपीडी सुचारु रूप से संचालित नहीं हो पा रही है, जिससे महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।महिला समिति का कहना है कि प्रदेश के एकमात्र राज्य स्तरीय मातृ एवं शिशु अस्पताल को उसके वर्तमान स्थान से हटाना महिलाओं के हितों के खिलाफ है। आरोप लगाया गया कि सरकार ने रोबोटिक सर्जरी के नाम पर अस्पताल की व्यवस्थाओं को बिखेर दिया है। गायनी और प्रसूति विभागों को अलग करने से मरीजों के साथ-साथ चिकित्सा विद्यार्थियों को भी पढ़ाई और प्रशिक्षण के लिए आईजीएमसी तथा केएनएच के बीच आना-जाना पड़ रहा है।समिति ने आशंका जताई कि 104 वर्षों से संचालित इस ऐतिहासिक अस्पताल की जगह विधायकों के आवास बनाने की योजना बनाई जा रही है। समिति ने सरकार से तीसरे चरण के निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू करने, रोबोटिक सर्जरी और आईवीएफ सेंटर की सुविधा कमला नेहरू अस्पताल में ही उपलब्ध कराने तथा गायनी ओपीडी को तुरंत केएनएच में बहाल करने की मांग की है। साथ ही उच्च न्यायालय से भी मामले में शीघ्र सुनवाई कर महिलाओं और मरीजों को राहत प्रदान करने का आग्रह किया गया।
