राहुल चावला, धर्मशाला-:मक्लोडगंज के नड्डी स्थित ऐतिहासिक डल झील में शुक्रवार से राधाष्टमी मेले का शुभारंभ हो गया। मेले की शुरुआत टेंगल मोड़ से डल झील तक निकाली गई एंटी चिट्टा जागरूकता रैली से हुई। रैली के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए समाज से नशे के खिलाफ सामूहिक रूप से आगे आने की अपील की गई।कांगड़ा जिले को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस अभियान को मणिमहेश यात्रा से भी जोड़ा गया। शाहपुर क्षेत्र में आयोजित वॉकाथॉन में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। शाहपुर के विधायक एवं उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने रैली को रवाना किया। उन्होंने लोगों से चिट्टे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
पठानिया ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नशे के खिलाफ अभियान चला रही है। इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए शाहपुर और पूरे कांगड़ा जिले में भी जागरूकता गतिविधियों को तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन अपने स्तर पर नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन इस समस्या पर प्रभावी रोक लगाने के लिए समाज का सहयोग बेहद जरूरी है।उन्होंने अभिभावकों से अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने और नशे से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस या प्रशासन को देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब गांव-गांव और घर-घर से लोग नशे के खिलाफ मुहिम से जुड़ेंगे, तभी नशामुक्त कांगड़ा और हिमाचल का लक्ष्य आगे बढ़ सकेगा।विधायक ने कहा कि मणिमहेश यात्रा के दौरान आयोजित कार्यक्रम में भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर चिट्टे के खिलाफ लोगों को जागरूक करने और इसके विरुद्ध संकल्प लेने का संदेश दिया गया। उन्होंने नशे के खिलाफ पुलिस प्रशासन की ओर से किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान डल झील और राधाष्टमी मेले का भी उल्लेख किया गया। पठानिया ने कहा कि डल झील में पानी की समस्या को लेकर लंबे समय से चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों के चलते अब यहां सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने उपायुक्त कांगड़ा, बीडीओ, एसडीएम और संबंधित विभागों के अधिकारियों तथा इंजीनियरों के प्रयासों की सराहना की।उन्होंने बताया कि मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाओं के साथ भंडारे का भी आयोजन किया गया है।मेले और मणिमहेश यात्रा से जुड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय स्कूलों, तिब्बती स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, स्वास्थ्य विभाग और अन्य विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी सहयोग कर रहे हैं। पठानिया ने इसे प्रशासन और स्थानीय लोगों का सामूहिक प्रयास बताया।उन्होंने कहा कि एंटी चिट्टा अभियान को भविष्य में पूरे कांगड़ा जिले में जारी रखा जाएगा और शाहपुर क्षेत्र में इसे विशेष रूप से गति दी जाएगी।
