राहुल चावला, धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के एकमात्र राज्य युद्द स्मारक धर्मशाला में करगिल विजय दिवस बड़े ही ओजस्वी तौर तरीकों से आयोजित किया गया। यहां भारतीय सेना के जवानों और आला अधिकारियों ने भी शिरकत की। भारतीय सेना की धर्मशाला छावनी यूनिट के डिप्टी कमांडर ब्रिगेडियर केवीपी सिंह ने बतौर मुख्यतिथि इस कार्यक्रम में शिरकत की और अमर जवान ज्योति को प्रजव्वलित करते हुए यहां स्थापित की गई तमाम शहीदों की प्रतिमाओं पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि प्रदान की।
इस दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए ब्रिगेडियर केवीपी सिंह ने कहा कि आज वो अपनी भारतीय सेना और तमाम नागरिकों की ओर से उन तमाम शहीदों के प्रति अपना सम्मान प्रकट करते हैं जिन्होंने अपनी जवानी भरी जिंदगी की कोई परवाह न करते हुए हंसते-हंसते देश पर अपने प्राणों को सहर्ष ही न्यौछावर कर दिया। ब्रिगेडियर केवीपी सिंह ने बताया कि इतिहास गवाह है कि जो युद्ध हमारी सेना और जाबांज सिपाहियों ने करगिल जैसी दुर्गम, कठिन और ऊंची पहाड़ियों पर लड़ा ऐसा युद्ध कभी किसी ने नहीं लड़ा, इतना ही नहीं ये युद्ध न केवल लड़ा गया बल्कि इसे हमारे जवानों और सेनाओं ने अपने अदम्य साहस से जीत भी लिया ऐसे में आज का दिन हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता हैं।
उन्होंने कहा कि आज के नौजवानों को हमारे पूर्वजों के इस बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए और उनके बलिदान से सीख लेते हुए खुद को भी देश सेवा में अग्रिम पंक्ति में भाग लेना चाहिए। वहीं इसी युद्ध में अपने पिता को खो चुकी और भारतीय सेना की छाबनी में सैनिकों की चिकित्सा करने वाली जया ने नम आखों से बताया कि उस वक्त उनके पिताजी उधमपुर में तैनात थे। जब उन्होंने शहादत पाई थी, तब वो महज 12 साल की थीं और सातवीं में पढ़ा करती थीं, जबकि भाई 9 साल के थे जो कि चौथी कक्षा के छात्र थे।
उन दिनों वो नादान थे उन्हें इस बारे में कोई इल्म नहीं था मगर आज जब बड़े हुए हैं तो वह उनके उस बहुमूल्य योगदान को याद करके बेहद गर्व महसूस करते हैं। जया ने बताया की वो मंडी के रहने वाले थे तो ऐसे में उनके नाम पर एक स्कूल भी हैं जहां वो हर साल जाकर 1 जुलाई को बच्चों के लिए कार्यक्रम का आयोजन भी करते हैं और उनकी प्रतिमा पर श्रद्धासुमन भी अर्पित करते हैं। ये दिन सभी देशवासियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण दिन हैं।
