शिमला/कमल भारद्वाज: देवभूमि हिमाचल प्रदेश में महिलाओं के प्रति दुर्व्यवहार के मामले चिंताजनक स्थिति में डाल रहे हैं। हालांकि कोरोना काल के 2 सालों के बाद आंकड़ों में कुछ गिरावट दर्ज की गई। महिलाओं के प्रति छेड़छाड़, घरेलू हिंसा और रेप की घटनाएं सामने आने से डर का माहौल महिलाओं में बन गया है। पहले प्रदेश में इस तरह की घटनाएं इक्का-दुक्का सामने आती थी। 2022 के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में महिलाएं कितनी सुरक्षित है।
2021 में 2100 था आंकड़ा
साल 2021 में गुड़िया हेल्पलाइन नंबर के जरिए 2,100 केस रजिस्टर हुए। सबसे ज्यादा मामले जिला मंडी से 346 थे। इसके बाद शिमला में 341,कांगड़ा 339,सिरमौर 252, चंबा 156, सोलन 145, बिलासपुर 140, हमीरपुर 138, उना 128, कुल्लू 90, किन्नौर 22 और लाहौल स्पीति में सबसे कम 3 मामले आए।
2022 में 1,650 केस हुए रजिस्टर
जिला कांगड़ा में महिलाओं के प्रति अपराधिक मामलों की संख्या 323, मंडी 253, शिमला 197, सिरमौर 183, उना 140,चंबा 123, सोलन 115, कुल्लू 112, बिलासपुर 94, हमीरपुर 83, किन्नौर 22 और लाहौल स्पीति में 5 मामले दर्ज किए गए। 2021 में छेड़छाड़ के 486 मामले आए जिसमें 296 महिलाओं और 190 लड़कियों ने शिकायत दर्ज कराई। 2022 में 403 मामले आए जिसमें 246 महिलाएं और157 लड़कियों की शिकायतें दर्ज हुई।
लोक लाज और फैमिली प्रेशर के चलते छुपाती है महिलाएं
गुड़िया सक्षम बोर्ड की उपाध्यक्ष रूपा शर्मा ने जानकारी देते हुए कहा कि कोरोना काल के बाद स्थिति में सुधार जरूर आया है लेकिन महिला संबंधी जब रेप, मारपीट,छेड़छाड़ की शिकायतें आती है तो दिल सहम सा जाता है।उन्होंने कहा कि अभी कोर्ट में 35 के लगभग केस है जिन पर फैसला आना है बाकी है। अपने साथ हुए दुराचार को महिलाएं और लड़कियां लोक लाज और फैमिली प्रेशर के चलते छुपाती है।जिससे इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने वालों की हिम्मत बढ़ जाती है।
